अगर मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट जारी रहा, तो खुदरा ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी को शायद टाला न जा सके। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बात भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के डायरेक्टर (ह्यूमन रिसोर्सेज) राज कुमार दुबे ने कही है। कच्चे तेल में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसे देखते हुए दुबे ने नीति निर्माताओं के सामने 3 विकल्प रखे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार उनका कहना है, "अब, 2 या 3 विकल्प खुले हैं। एक है- कीमतों में बढ़ोतरी, जो पेट्रोल पंपों पर साफ दिखाई दे। दूसरा है- पेट्रोलियम कंपनियां नुकसान खुद उठाएं और घाटा बढ़ाती रहें। तीसरा विकल्प है- सरकार डेफिसिट फाइनेंसिंग के जरिए फंड की व्यवस्था करे।" डेफिसिट फाइनेंसिंग मतलब सरकार बढ़ते खर्च या नुकसान को पूरा करने के लिए अतिरिक्त पैसा जुटाए। दुबे ने बताया कि वैश्विक कीमतों में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी को शुरू में अस्थायी माना गया था, लेकिन जिस तरह से हालात बन रहे हैं, लगता है कि यह सिलसिला जारी रहेगा।
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी। उसके बाद ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण कर लिया। व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई। इससे कच्चे तेल और गैस का ट्रांसपोर्टेशन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नतीजतन कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही है। आमतौर पर पूरी दुनिया को सप्लाई होने वाले कच्चे तेल का 5वां हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होते हुए दुनिया भर के ग्राहकों तक पहुंचता है।
हालात नहीं सुधरे तो बढ़ोतरी होना तय
दुबे के मुताबिक, "मौजूदा हालात को देखते हुए, अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो मुझे लगता है कि ईंधन की कीमतों में एक और बढ़ोतरी होनी चाहिए।" उन्होंने बढ़ोतरी की मात्रा के बारे में साफ-साफ कुछ नहीं कहा। लेकिन यह जरूर कहा कि अगर लंबे समय तक मौजूदा हालात बने रहे तो बढ़ोतरी होना तय है। आपूर्ति सुरक्षा के मामले में दुबे ने भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत को झटकों से बचाने का श्रेय कूटनीतिक प्रयासों और आपूर्ति (सप्लाई) के स्रोतों में विविधता लाने को दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर 20 लाख बैरल से ज्यादा तेल के अटक जाने से पैदा हुई कमी को केवल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर ही पूरा किया जा सकता है। फिर चाहे वह रूसी तेल हो, या अफ्रीका से आया तेल हो, या फिर किसी अन्य जगह से आया तेल हो।
BPCL और भारत की अन्य ऊर्जा कंपनियों ने अपनी आपूर्ति के स्रोतों का काफी विस्तार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुबे का कहना है, "पहले, हमारे पास सप्लाई के केवल 20 पॉइंट थे। अब 20 से बढ़कर ये 40 हो गए हैं, जिनमें रूस भी शामिल है। आपूर्ति की इन विविध लाइनों से हमें पर्याप्त सुरक्षा मिल रही है।" यह भी कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद भारत में ईंधन की खपत बढ़ी है। फिर भी, हम बिना किसी कमी के इसे पूरा करने में सक्षम हैं।