नायरा के बाद शेल इंडिया ने भी बढ़ाए पेट्रोल और डीजल के दाम, आम आदमी की जेब पर प्राइवेट पंपों का प्रहार

Petrol Diesel Price Hikes: भारत में तेल का बाजार दो हिस्सों में बंटा है, जिसके कारण कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। IOC, BPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं क्योंकि उन्हें सरकार से समर्थन मिलता है। वहीं नायरा और शेल जैसी प्राइवेट कंपनियों को घाटे की भरपाई के लिए कोई सरकारी मुआवजा नहीं मिलता

अपडेटेड Apr 01, 2026 पर 1:45 PM
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शेल इंडिया ने डीजल की कीमतों में ₹25.01 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है

Shell India: आज, 1 अप्रैल को प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स ने ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर आम जनता को बड़ा झटका दिया है। नायरा एनर्जी के बाद अब शेल इंडिया ने भी पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान पर पहुंचा दिए हैं। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार रहने के कारण प्राइवेट कंपनियां अपना घाटा कम करने के लिए यह कदम उठा रही हैं। भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक युद्ध या संकट का असर यहां तुरंत दिखाई देता है।

बेंगलुरु में पेट्रोल-डीजल के नए रेट

शेल इंडिया ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कीमतों में सबसे बड़ी वृद्धि की है। पेट्रोल की कीमतों में ₹7.41 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। अब नॉर्मल पेट्रोल ₹119.85 और 'पावर' वेरिएंट ₹129.85 प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं डीजल की कीमतों में सबसे ज्यादा ₹25.01 प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। अब नॉर्मल डीजल ₹123.52 और प्रीमियम डीजल ₹133.52 प्रति लीटर पर पहुंच गया है।


ईरान युद्ध और होर्मुज संकट का असर

ईंधन की कीमतों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 60% का उछाल आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण सप्लाई रुकने का खतरा बढ़ गया है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में डीजल की कीमतें ₹148 से ₹165 प्रति लीटर तक जा सकती हैं।

प्राइवेट बनाम सरकारी कंपनियां: क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

भारत में तेल का बाजार दो हिस्सों में बंटा है, जिसके कारण कीमतों में यह अंतर दिख रहा है। IOC, BPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं क्योंकि उन्हें सरकार से समर्थन मिलता है। वहीं नायरा और शेल जैसी प्राइवेट कंपनियों को घाटे की भरपाई के लिए कोई सरकारी मुआवजा नहीं मिलता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने पर वे सारा बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल देते हैं।

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