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Israel-Iran War: 4 साल के हाई पर पहुंची एल्यूमीनियम की कीमत, लंबी चली लड़ाई तो सप्लाई को होगा और नुकसान

Israel-Iran War: मिडिल ईस्ट में कतर और बहरीन में कम से कम दो बड़े स्मेल्टर्स को एल्यूमीनियम की डिलीवरी रोकनी पड़ी है। रविवार को ईरान ने पड़ोसी देशों पर हमले किए, जबकि इजरायल ने तेहरान में फ्यूल डिपो पर हमला किया

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Mar 09, 2026 पर 9:36 AM
Israel-Iran War: 4 साल के हाई पर पहुंची एल्यूमीनियम की कीमत, लंबी चली लड़ाई तो सप्लाई को होगा और नुकसान
पिछले हफ्ते एल्यूमीनियम की कीमत लगभग 10% बढ़ गई थी।

मिडिल ईस्ट में बढ़ती दुश्मनी की वजह से एल्यूमीनियम की कीमत लगभग 4 साल के हाई पर पहुंच गई है। रिस्क लेने की क्षमता कम होने से कॉपर और दूसरे इंडस्ट्रियल मेटल्स में भी गिरावट आई। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, लंदन मेटल एक्सचेंज पर एल्यूमीनियम का भाव 1.6% बढ़कर 3,499.50 प्रति टन हो गया। यह अप्रैल 2022 के बाद का सबसे ज्यादा भाव है। पिछले हफ्ते एल्यूमीनियम की कीमत लगभग 10% बढ़ गई थी। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की वजह से फारस की खाड़ी से शिपमेंट में रुकावट आई थी। इस रूट से एल्यूमीनियम की ग्लोबल सप्लाई का लगभग 9% हिस्सा गुजरता है।

मिडिल ईस्ट में कतर और बहरीन में कम से कम दो बड़े स्मेल्टर्स को एल्यूमीनियम की डिलीवरी रोकनी पड़ी है। इसके बाद अमेरिका में इस मेटल के खरीदार एशिया से दूसरे कार्गो लेने की जल्दी में हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई लंबे समय तक चली तो एल्यूमीनियम की सप्लाई को और नुकसान होगा।

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार

पश्चिम एशिया में छाए संकट की वजह से सोमवार को कच्चे तेल की कीमत में लगभग 20% की तेजी आई और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के मार्क को क्रॉस कर गया। लगभग 4 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गई है। संघर्ष और गहराने से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सप्लाई कम होने और शिपमेंट में लंबे समय तक रुकावट का डर बढ़ गया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध की वजह से दुनिया भर के कंज्यूमर्स और बिजनेसेज को हफ्तों या महीनों तक फ्यूल की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। टॉप ऑयल एक्सपोर्टर सऊदी अरब लाल सागर से शिपमेंट बढ़ा रहा है। लेकिन शिपिंग डेटा से पता चला है कि यह वॉल्यूम संकट में फंसे होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई में आई गिरावट की भरपाई के लिए काफी नहीं है।

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