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Adhik Maas 2026: 17 मई से शुरू होने जा रहे अधिक मास में भूल कर भी न करें ये काम, वर्ना पड़ेगा पछताना

Adhik Maas 2026: अधिक माह हिंदू पंचाग का एक अतिरिक्त महीना है, जो निश्चित अंतराल पर आता है। इसका हिंदू धर्म में विशेष स्थान है और इस माह को धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और दान आदि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इस माह में कुछ काम नहीं करने चाहिए। आइए जानें इनके बारे में

MoneyControl Newsअपडेटेड May 12, 2026 पर 8:55 PM
Adhik Maas 2026: 17 मई से शुरू होने जा रहे अधिक मास में भूल कर भी न करें ये काम, वर्ना पड़ेगा पछताना
अधिक मास में दान, पुण्य, जप और तप का फल कई गुना अधिक मिलता है।

Adhik Maas 2026: अधिक मास को पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। यह हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना है। इसका गहरा धार्मिक महत्व है और यह पूजा, अनुष्ठान और दान कर्म के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी हिंदू कैलेंडर में अधिक मास लगभग हर 32 माह, 16 दिन और 4 घटी के अंतराल के बाद आता है। इसे सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिए जोड़ा जाता है। इस अंतर को अगर ठीक न किया जाए, तो होली या दिवाली जैसे हमारे त्योहार गहरे प्रभावित होंगे। इसलिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं। इस महीने में दान, पुण्य, जप और तप का फल कई गुना अधिक मिलता है। लेकिन इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।

अधिकमास में 6 काम करने से बचें

अधिकमास में मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। इस दौरान विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार और सगाई भूलकर भी नहीं करने चाहिए। माना जाता है कि इस समय किए गए शुभ कार्य अच्छा परिणाम नहीं देते।

अधिकमास में नए घर की नींव रखना या नए घर में प्रवेश करना भी अशुभ मान जाता है। कहते हैं ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

नया बिजनेस शुरू करने का काम भी अधिकमास में भूलकर भी न करें। कहते हैं इस दौरान शुरू किये गये काम में असफलता मिलने की ज्यादा संभावना रहती है।

अधिकमास में जमीन, सोना, नई गाड़ी या अन्य महंगी चीजों को खरीदना भी अशुभ माना जाता है। कहते हैं इससे अशुभ फलों की प्राप्ति होती है।

अधिकमास में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन करने से भी मना किया जाता है। कहते हैं इस महीने में सात्विक जीवन जीने से ही पुण्य मिलता है।

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