Apara Ekadashi 2026 Katha: अपरा एकादशी कल, पितरों के उद्धार के लिए इस व्रत में जरूर सुनें राजा महीध्वज की कथा

Apara Ekadashi 2026 Katha: आज ज्येष्ठ माह की पहली एकादशी है, जिसे अपरा या अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस व्रत में राजा महीध्वज की कथा जरूर सुननी चाहिए। माना जाता है कि इस कथा को सुनने से पितरों का उद्धार होता है। आइए जानें क्या है ये व्रत कथा और एकादशी पूजा का मुहूर्त

अपडेटेड May 12, 2026 पर 8:36 PM
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इस साल यह व्रत आज यानी 13 मई, 2026 को किया जा रहा है।

Apara Ekadashi 2026 Katha: ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी अपरा एकादशी का व्रत कल किया जाएगा। माना जाता है कि इस व्रत को करने वाले भक्तों को अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। इस साल यह व्रत 13 मई, 2026 को किया जा रहा है। साथ ही यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सबसे आसान मार्ग भी माना जाता है। हिंदू माह की सभी तिथि में एकादशी भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। इसलिए भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जातक एकादशी व्रत करते हैं।

हर हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह में एकादशी तिथि कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आती है। इस तरह पूरे साल में कम से कम 24 एकादशी तिथियों का संयोग प्राप्त होता है। लेकिन अधिक मास में इसकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। इस अतिरिक्त माह में पद्मिनी और परमा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल ज्येष्ठ माह में लग रहे अधिक मास के दौरान भी ऐसा ही होगा। आइए जानें इस साल अपरा एकादशी के व्रत का मुहूर्त क्या है और इसमें राजा महीध्वज की कक्षा सुनने का क्या महत्व है?

तिथि और समय

व्रत तिथि आरंभ : 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे

व्रत तिथि समाप्त : 13 मई 2026, दोपहर 1:29 बजे

व्रत पालन (उदया तिथि अनुसार): 13 मई 2026, बुधवार


पारण मुहूर्त : 14 मई 2026, सुबह 5:31 से 8:14 बजे तक

अपरा एकादशी व्रत में जरूर सुनें राजा महीध्वज की कथा

प्राचीन काल में राजा महीध्वज धर्मात्मा और न्यायप्रिय शासक थे। उनके छोटे भाई वज्रध्वज को उनसे ईर्ष्या थी। उसने षड्यंत्र रचकर राजा की हत्या कर दी और शव को जंगल के पीपल वृक्ष के नीचे गाड़ दिया। राजा की आत्मा प्रेत योनि में भटकने लगी और राहगीरों को कष्ट देने लगी। एक दिन ऋषि धौम्य वहां आए। उन्होंने तपोबल से राजा की दशा जानी और उसे मुक्ति का उपाय बताया। ऋषि ने स्वयं अपरा (अचला) एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य राजा महीध्वज को अर्पित किया। इससे भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपरा एकादशी का पुण्य और अपनी कृपा से राजा महीध्वज को प्रेत योनि से मुक्ति प्रदान कर दी। उसके पश्चात राजा महीध्वज ने एक दिव्य शरीर प्राप्त किया और फिर वे स्वर्ग चले गए। श्रीहरि की कृपा से उनको मोक्ष मिल गया।

अपरा एकादशी का महत्व

इस व्रत को “अचला एकादशी” भी कहा जाता है। पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में इसे भद्रकाली एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां दुर्गा के भद्रकाली स्वरूप की पूजा की जाती है। जबकि उड़ीसा में जलक्रीड़ा एकादशी के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ की पूजा होती है।

पापों का नाश : ब्रह्महत्या, निन्दा, परनिन्दा, प्रेत योनि जैसे दोषों से मुक्ति मिलती है।

धन-धान्य और यश : जीवन में सुख-समृद्धि और अपार तरक्की आती है।

मोक्ष प्राप्ति : व्रत करने वाले को स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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