Apara Ekadashi 2026 Vrat: एकादशी व्रत को हिंदू धर्म में बहुत महान व्रत माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में भक्त फलाहारी या निरजला उपवास करते हैं। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। ऐसा ही व्रत है अपरा एकादशी का। अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 12 मई 2026 को किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। इस एकादशी को अचला एकादशी और भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानें क्या है इस नाम का महत्व?
अपरा एकादशी व्रत 2026 तारीख
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 मई 2026 को दोपहर 02:52 बजे से होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 13 मई 2026 को दोपहर 01:29 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, व्रत 13 मई को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 14 मई 2026 को सुबह 05:32 से 08:15 के बीच किया जा सकता है।
अपरा एकादशी को अचला एकादशी के साथ-साथ भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। खासतौर से पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में अपरा एकादशी को भद्रकाली एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां भद्रकाली की भी पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु की शक्ति से देवी भद्रकाली प्रकट हुई थीं। मां भद्रकाली को दुर्गा मां का रूप माना जाता है। इनकी पूजा करने से शत्रु, भय और हर तरह के संकटों से छुटकारा मिलता है।
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। विष्णु सहस्त्रनाम और गीता पाठ का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सात्विक भोजन करें और कई लोग निर्जल या फलाहार व्रत भी रखते हैं। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है।
अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनेक यज्ञ और तीर्थ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो जीवन में आर्थिक परेशानियों, मानसिक तनाव या पाप कर्मों से मुक्ति पाना चाहते हैं। पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस एकादशी का महत्व बताया था। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।