Commodity Market: फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा ने शुगर कंट्रोल ऑर्डर को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। संजीव चोपड़ा ने कहा कि सरकार शुगर कंट्रोल ऑर्डर में बदलाव की योजना बना रही है। इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से बदलाव की योजना तैयार की जा रही है। जिसे जल्द पब्लिक कंसल्टेशन के लिए ड्राफ्ट रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि नियमों को आसान बनाना, इंडस्ट्री के साथ तालमेल मकसद होगा। फूड सेक्रेटरी ने क्या बदलाव किए जाएंगे इसको लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। बता दें कि मई 2025 मेंया शुगर कंट्रोल ऑर्डर 2025 लागू हुआ था। 1966 के पुराने कानून की जगह नया नियम आया था । रॉ शुगर भी अब कंट्रोल ऑर्डर के दायरे में आता है। देश में गन्ने की अधिक पैदावार के चलते 2025-26 के सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी का उत्पादन 34.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
डालमिया भारत शुगर डिप्टी ED कपिल नेमा ने कहा कि ये बात अच्छी है कि सरकार इंडस्ट्रीज के बारे में सोच रही है। 2025-26 के सीजन में चीनी का उत्पादन 34.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है। इंडस्ट्रीज सरकार से MSP बढ़ाने की मांग कर रही है। गन्ने की FRP बढ़ रही है लेकिन चीनी की MSP नहीं बढ़ रही है।
उन्होंने आगे कहा कि एक मिल औसतन 250 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदती है। एक सीजन में 170-175 करोड़ रुपये की वर्किंग कैपिटल मिलती है। MSP बढ़ती है तो मिलों को ज्यादा वर्किंग कैपिटल मिलेगा। क्योंकि MSP शुगर इंडस्ट्रीज की बैकबोन है।उन्होंने आगे कहा कि हमारी सरकार ने एथेनॉल के दाम बढ़ाने की मांग है।
इस बीच सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता असीम मनचंदा से हुई बातचीत के दौरान इस्मा के प्रेसिडेंट गौतम गोयल ने कहा स साल चीनी का उत्पादन 345 लाख टन रह सकता है। पिछले साल के मुकाबले 5% ज्यादा चीनी उत्पादन होने की उम्मीद है। सरकार को इथेनॉल एलोकेशन का कोटा बढ़ाना चाहिए। चीनी कंपनियों को मात्र 28 परसेंट का कोटा दिया गया है। उनकी एथेनॉल की कीमत भी बढ़ाने की मांग है। सरकार को चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य भी बढ़ाना चाहिए। न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाकर 41 रुपए 66 पैसे किया जाना चाहिए। इस बीच सरकार ने भी इंडस्ट्री के लिए कदम उठाने का भरोसा दिलाया है।
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