कायनात चैनवाला
कायनात चैनवाला
23 जनवरी को खत्म हुए हफ्ते के दौरान बाजार में उथल-पुथल रही। इसकी वजह ग्रीनलैंड पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बदलाव, ट्रांसअटलांटिक ट्रेड वॉर का डर और अमेरिका-ईरान के बीच फिर से बढ़ा तनाव था। बढ़ी हुई अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच डॉलर इंडेक्स गिरकर 97.42 पर आ गया। यह सितंबर 2025 के बाद इसका सबसे निचला स्तर है। ट्रंप की यूरोप के खिलाफ टैरिफ की धमकियों और ग्रीनलैंड को हासिल करने की नई कोशिशों से निवेशक परेशान हो गए। हालांकि ट्रंप तत्काल टैरिफ कार्रवाई की योजना को रद्द कर चुके हैं और अमेरिका व यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड वॉर की चिंता भी कम हो गई है। लेकिन इसके बावजूद अमेरिका-यूरोपीय संघ के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं।
इस बीच मजबूत अमेरिकी आर्थिक डेटा ने संकेत दिया है कि तत्काल पॉलिसी में ढील की जरूरत कम है। इन डेटा में अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के दौरान अमेरिकी GDP में 4.4% की बढ़ोतरी, बेरोजगारी के कम दावे और स्थिर PCE महंगाई शामिल हैं। अमेरिकी शेयर बाजार लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट में बंद हुए।
सोने और चांदी की चाल
बुलियन में जबरदस्त तेजी आई। सोने और चांदी ने सेफ एसेट के लिए बढ़ती हुई मांग के बीच नए रिकॉर्ड हाई बनाए। Comex सोना बीते सप्ताह 8% से ज्यादा उछला और लगातार तीसरे हफ्ते बढ़त जारी रखते हुए 4990 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब सेटल हुआ। चांदी 14% से ज्यादा बढ़ी। इसने पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार किया और 103 डॉलर से ऊपर सेटल हुई।
यह तेजी अमेरिकी एसेट्स में घटते विश्वास, नए व्यापारिक टकराव, कमजोर डॉलर, जारी भू-राजनीतिक जोखिमों और केंद्रीय बैंकों की ओर से लगातार खरीदारी से प्रेरित थी। अमेरिकी राजकोषीय अनुशासन, फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और जापानी सरकारी बॉन्ड में तनाव को लेकर चिंताओं ने मांग को और बढ़ा दिया। भारत ने भी MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी।
दूसरे मेटल्स का हाल
बेस मेटल्स ने मोटे तौर पर सकारात्मक प्रदर्शन किया और इसका नेतृत्व निकेल ने किया। इंडोनेशिया द्वारा सख्त अयस्क कोटा और अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत देने के बाद सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितता के कारण निकेल 6% से ज्यादा चढ़ गया। तांबा 2% से ज्यादा बढ़कर 13,100 डॉलर प्रति टन से ऊपर बंद हुआ। तांबे ने सप्लाई रिस्क और निकट भविष्य में उपलब्धता में सुधार के बीच संतुलन को दर्शाया। चिली में कैपस्टोन कॉपर की मैंटोवर्दे खदान में लेबर की हड़ताल के कारण प्रोडक्शन में रुकावट से सपोर्ट मिला। लेड यानि सीसा एकमात्र खराब प्रदर्शन करने वाला मेटल रहा, जो लगभग 1% गिर गया।
कच्चे तेल का कैसा रहा रुख
WTI कच्चे तेल ने बीते सप्ताह का अंत मामूली बढ़त के साथ किया। शुक्रवार को इसमें अच्छा उछाल आया और यह एक हफ्ते के उच्चतम स्तर 61.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दरअसल अमेरिका ने ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों और फर्मों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इससे भू-राजनीतिक जोखिम फिर से बढ़ गया है। डेली चार्ट पर, MCX कच्चे तेल वायदा में पिछले शुक्रवार को जबरदस्त तेजी देखी गई और यह 5,613 रुपये प्रति बैरल के पिछले स्विंग हाई से ऊपर बंद हुआ। कीमत अभी सुपरट्रेंड (7,3) और 20 EMA दोनों से ऊपर है, इसलिए ट्रेंड बुलिश है। अगले हफ्ते भी तेजी जारी रहने की उम्मीद है। शुरुआती रेसिस्टेंस 5,820 रुपये के पास और फिर 5,900 रुपये पर होगा। किसी भी गिरावट पर सपोर्ट 5,400 रुपये पर है।
नए हफ्ते में किन चीजों पर रहेगी कमोडिटी मार्केट की नजर
ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की ओर से किसी भी हमले को पूरी तरह से युद्ध माना जाएगा। ऐसे में बाजार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए सप्लाई में रुकावट के जोखिम को लेकर सतर्क हैं। यह एक संकरा, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो तेल समृद्ध फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इस रास्ते से दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की आवाजाही होती है। इसके अलावा अमेरिका में स्थिर महंगाई और मजबूत उपभोक्ता खर्च से फेड की आगामी मीटिंग में प्रमुख ब्याज दर में कोई बदलाव न होने की संभावना है। ट्रंप का भाषण, US PPI, और टिकाऊ सामानों का डेटा पॉलिसी की उम्मीदों को आकार देगा। इन सभी फैक्टर्स पर कमोडिटी मार्केट की नजर रहेगी।
(कायनात चैनवाला, कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की सीनियर मैनेजर हैं।)
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