Crude Oil Price Alert: डिमांड नहीं बल्कि जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ाएगा दाम, क्या $80 से भी ज्यादा ऊपर जाएगी कीमतें

Crude Oil Price Alert: नरेंद्र तनेजा ने कहा कि अगर ईरान-अमेरिका में युद्ध होता है तो कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे। बाजार में अभी तेल की सप्लाई अच्छी है। नरेंद्र तनेजा ने आगे कहा कि बाजार में तनाव है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं है। अमेरिका मान रहा है कि युद्ध हुआ तो दाम बेकाबू नहीं होंगे

अपडेटेड Feb 19, 2026 पर 1:17 PM
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नरेंद्र तनेजा ने कहा कि अगर ईरान-अमेरिका में युद्ध होता है तो कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे। बाजार में अभी तेल की सप्लाई अच्छी है।

Crude Oil Alert: कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। ब्रेंट का भाव 70 डॉलर यानी 6 महीनों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। वहीं WTI में भी $65 के ऊपर कारोबार कर रहा जबकि MCX पर भी दाम 6000 के करीब पहुंचा।

जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ाएगा कच्चे तेल के दाम

नरेंद्र तनेजा ने कहा कि अगर ईरान-अमेरिका में युद्ध होता है तो कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे। बाजार में अभी तेल की सप्लाई अच्छी है। नरेंद्र तनेजा ने आगे कहा कि बाजार में तनाव है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं है। अमेरिका मान रहा है कि युद्ध हुआ तो दाम बेकाबू नहीं होंगे। अमेरिका- ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहता है।


उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका मान रहा है कि तेल के दाम $80 तक पहुंच सकते है। हालांकि मेरा मानना यह है कि यह केवल सत्ता परिवर्तन के कारण दबाव बना हुआ है। वहीं ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना चाहता है।

अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन हो जाता है और ईरान तेल के बाजार में आता है तब तक तेल की कीमतें स्टेनेबल तौर पर 55 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकती है। क्योंकि सप्लाई में बढ़ोतरी हो जाएगी। लेकिन अगर ईरान हमाला करता है और स्थिति बेकाबू होती है तो कीमतों में उछाल संभव है। हालांकि ईरान सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता।

डिमांड से नहीं बल्कि जियोपॉलिटिकल तनाव से तय हो रही कीमतें

इस बीच Trading.com के CEO पीटर मैकगायर ने कहा कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव और बढ़ता है तो ब्रेंट $75 प्रति बैरल तक जा सकता है। क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें डिमांड से नहीं बल्कि जियोपॉलिटिकल तनाव से तय हो रही है। उन्होंने कहा, "इसका असर चीन और बेशक, पूरे एशिया में बहुत ज़्यादा महसूस होगा। और कोई भी रुकावट कीमतों में तुरंत 'वॉर प्रीमियम' डाल देगी। हालांकि यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि यह कितने समय तक रहेगा। क्रूड की सप्लाई की वजह से कीमतें ज़्यादा नहीं हैं और अगर जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम खत्म हो जाता है तो मार्केट में तेल की भरमार से तेल के दाम और नीचे जा सकते हैं।

मैकगायर ने रूस-यूक्रेन की अनसुलझी स्थिति को एनर्जी मार्केट को किनारे पर रखने वाला एक और कारण बताया।हालांकि अभी तक पूरी तरह से लड़ाई पक्की नहीं है, मैकगायर को लगता है कि अभी शुरुआती दिन हैं। कुछ एनालिस्ट का कहना है कि अप्रैल तक मिलिट्री एक्शन की संभावना 50% या उससे ज़्यादा हो सकती है। मुख्य बात यह होगी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े किसी भी ईरानी खतरे पर अमेरिका क्या प्रतिक्रिया देगा, क्योंकि जलमार्ग के बारे में बयानबाजी भी दुनिया भर की कीमतों को बदल सकती है।

कीमतों के बेकाबू होनी की क्या है वजह

US-ईरान के बीच जिनेवा में बात नहीं बनी। ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का डर दिखा रहा है। हालांकि ईरान के खिलाफ इजराइल सख्त नतीजा चाहता है। तेहरान का कहना है कि न्यूक्लियर डील फ्रेमवर्क पर सामान्य सहमति बने। जेडी वेंस ने कहा ईरान ने US की शर्तें पूरी नहीं कीं। हालांकि डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि सैन्य विकल्प अब भी खुला है। बता दें कि US क्रूड स्टॉक 0.61 मिलियन बैरल घटा है।

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