Crude Oil:क्रूड में लगातार चौथे दिन तेजी जारी है। ब्रेंट का भाव $66 के करीब कायम है। वहीं WTI में भी $62 के करीब कारोबार कर रहा। जबकि MCX पर भाव 5500 रुपये के करीब पहुंचा है। दरअसल, OPEC+ के फैसले से कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। नवंबर में ओपेक ने 1.37 लाख BPD उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।
इस बीच यूक्रेन का रूस पर ड्रोन हमले जारी है। यूक्रेन की ओर से रूसी एनर्जी फैसिलिटी पर हालिया हमलों और अमेरिका और यूरोप की ओर से रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंधों के चलते सप्लाई बाधित हो सकती है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि OPEC+ का यह सतर्क फैसला बाजार संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। यूक्रेन का रूस पर ड्रोन हमले में किरिशी रिफाइनरी को नुकसान होगा। हमले से रिफाइनरी से उत्पादन घटा। उत्पादन फिर से शुरू होने में 1 महीना लगेगा।
कच्चे तेल की चाल पर नजर डालें तो 1 हफ्ते में इसमें 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है जबकि जनवरी 2025 से अब तक इसमें 12 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। वहीं 1 साल में इसने 15 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है।
एनर्जी मार्केट नरेंद्र तनेजा ने कहा कि सऊदी और OPEC बाजार पर अपना दबदबा सुनिश्चित कर रहे हैं। दाम कम रखकर सऊदी अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने की कोशिश कर रहा है।क्योंकि ट्रंप चाहते है कि कच्चे तेल का भाव काबू रहें। नरेंद्र तनेजा ने आगे कहा कि कच्चे तेल की मांग बढ़ नहीं रही है। डिमांड बढ़ नहीं रही है। कच्चे तेल की डिमांड भारत से ही बढ़ने की उम्मीद है। कल ही ब्रिटिश पेट्रोलियम ने कहा कि भारत जो रोजाना 55 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत करता है वह आने वाले समय में 90 लाख बैरल यानी दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बनेगा।
नरेंद्र तनेजा के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें 62-68-70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहेगी। अगले साल भी कच्चे तेल की 70 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाती नहीं दिखेगी।