क्रूड ऑयल की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं। 8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 1.49 फीसदी उछाल के साथ 98.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.72 फीसदी उछाल के साथ 93.97 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। 7 सितंबर को भी क्रूड में तेजी दिखी थी। जुलाई के बाद क्रूड़ की कीमतें सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह अच्छी खबर नहीं है, जो अपनी जरूरत का ज्यादा हिस्सा इंपोर्ट करता है।
4 मई को ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर पर पहुंच गया था
गोल्डमैन सैक्स ने क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। दिग्गज अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऑयल टैंकर्स पर हमले नहीं रुकते हैं तो क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। 28 मार्च को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों में उछाल दिखा है। 4 मई को भाव 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते में रुकावटें बढ़ रहीं
गोल्डमैन सैक्स में कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड Daan Struyven ने कहा, "पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि जहाजों की आवाजाही के लिहाज से रुकावटें बढ़ रही हैं।" अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर मामला फंसा हुआ है। सामान्य दिनों में इस रास्ते दुनिया का करीब 20 फीसदी ऑयल गुजरता है। लेकिन, अमेरिका और ईरान की लड़ाई की वजह से इस रास्ते ऑयल की सप्लाई नाममात्र की रह गई है।
महंगा क्रूड भारत के लिए बढ़ा सकता है मुसीबत
8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब बढ़ता दिखा। अगर यह 100 डॉलर पार करता है तो 23 जुलाई के बाद ऐसा पहली बार होगा। अमेरिका और ईरान के बीच जिस तरह से टकराव बना हुआ है, उससे क्रूड के 100 डॉलर पर पहुंच जाने के आसार दिखते हैं। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर के पार जाना भारत के लिए खराब है। भारत क्रूड की करीब 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है।
इस साल 4 बार बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 71 डॉलर पर था। इसका मतलब है कि यह उस लेवल से करीब 40 फीसदी ऊपर है। इससे पहले भारत में महंगे क्रूड की वजह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। अगर जल्द भाव नीचे नहीं आता है तो फिर से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी के दाम बढ़ा सकती हैं। इसका असर परिवारों के बजट पर पड़ेगा।
महंगे क्रूड की वजह से महंगाई को मिलेगी हवा
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल का सीधा असर दूसरी चीजों और सर्विसेज की कीमतों पर पड़ता है। पहले से ही विमान किराया आसमान में चल रहा है। पिछले छह महीनों में दूध, और ब्रेड सहित रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। रेस्टॉरेंट्स में भी खाना महंगा हो गया है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से लोगों के ऑफिस आने-जाने का खर्च बढ़ा है। पिछले कई महीनों से रिटेल इनफ्लेशन में लगातार इजाफा हो रहा है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो आरबीआई महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।