Crude Oil Price: किसी ने नहीं सोचा था कि क्रूड की कीमतें इतनी जल्द 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाएंगी। एनालिस्ट्स का कहना था कि अमेरिका-ईरान की लड़ाई खत्म होने के बाद भी क्रूड की कीमतों के लड़ाई से पहले के लेवल पर आने में कई महीनों का समय लगेगा। 25 जून को सितंबर ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स 72.89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्लूटीआई (वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट) पर अगस्त क्रूड ऑयल फ्यूचर्स गिरकर 69.36 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह क्रू़ड ऑयल का अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने से पहले का लेवल है।
30 अप्रैल को 126 डॉलर पर पहुंच गया था क्रूड
अमेरिका-ईरान में लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। उसके बाद क्रूड़ ऑयल की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। 30 अप्रैल को क्रूड ऑयल का भाव 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस लेवल से यह 42 फीसदी नीचे आ चुका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड की कीमतों में तेज गिरावट भारत के लिए अच्छी खबर है। क्रूड की कीमतों में उछाल के बाद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें कई बार बढ़ाई थीं।
सप्लाई बढ़ने पर 60-65 डॉलर तक आ सकता है भाव
क्रूड ऑयल में गिरावट की वजह अमेरिका-ईरान के बीच डील है। इस डील के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया है। इस रास्ते ऑयल टैंकर की आवाजाही शुरू हो चुकी है। इससे ऑयल की सप्लाई बढ़ी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में क्रूड की सप्लाई और बढ़ेगी। इसका असर क्रूड की कीमतों पर पड़ेगा। उधर, क्रूड ऑयल की डिमांड में नरमी के संकेत हैं। अगर क्रूड की सप्लाई बढ़ती है और इसकी डिमांड नरम रहती है तो इसका मतलब है कि क्रूड का भाव 60-65 डॉलर तक जा सकता है।
कई दशकों बाद ईरान को तेल बेचने की इजाजत
अमेरिका ने कई दशकों बाद ईरान को अपना तेल बेचने की इजाजत दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लड़ाई के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण जरूरी है। ईरान ज्यादा क्रूड बेचकर इसके लिए पैसे जुटाने की कोशिश करेगा। ईरान का ऑयल मार्केट में आने का असर क्रूड की कीमतों पर पड़ेगा। ईरान दुनिया में क्रूड का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है। भौगोलिक रूप से यह भारत और चीन के करीब स्थित है, जो क्रूड ऑयल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदार हैं।
क्रूड में नरमी भारत की इकोनॉमी के लिए अच्छा
भारत में सरकार ने क्रूड की कीमतों में तेज गिरावट से राहत की साांस ली है। क्रूड की कीमतें 100 डॉलर के पार कई दिनों तक बने रहने से सरकार का इंपोर्ट बिल काफी बढ़ गया था। इसका असर रुपये पर पड़ा था। डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट आई थी। रुपया अब कुछ संभलता दिख रहा है। अगर क्रूड में गिरावट जारी रहती है तो सरकार पर दबाव घटेगा। इसके रुपये को भी सहारा मिलेगा। भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है। इसलिए क्रूड में उछाल से डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिससे रुपया दबाव में आ जाता है।