Crude Oil Price: क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। 23 जुलाई को ब्रेट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। 24 जुलाई को यह 0.60 फीसदी गिरकर 100.027 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहता है तो कीमतों में तेजी जारी रह सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अमेरिका-ईरान में जल्द समझौता नहीं हुआ तो ब्रेट क्रूड का प्राइस 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। इसका भारत की इकोनॉमी पर काफी खराब असर पड़ेगा।
हूती विद्रोहियों के हमलों से लाल सागर का रास्ता भी बंद
ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट भाविक पटेल ने मनीकंट्रोल को बताया कि क्रूड ऑयल का शॉर्ट टर्म आउटलुक बुलिश है। उन्होंने कहा, "हूती विद्रोहियों के हमलों से लाल सागर का रास्ता भी बंद है। इस वजह से मध्यपूर्व से ऑयल बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी अरब लाल सागर के रास्ते से ऑयल बाहर भेज रहा था। लेकिन, हालिया हमलों के बाद यह रास्ता भी बंद हो गया।"
हालत नहीं बदले तो 120 डॉलर तक जा सकता है क्रूड ऑयल
उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाई में बाधा सिर्फ मध्यपूर्व तक सीमित नहीं है। काला सागर (Black Sea) में रूसी जहाजों पर हमलों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। इससे आगे क्रूड की सप्लाई में बड़ी दिक्कत आ सकती है। खरीदार जल्द डिलीवरी के लिए प्रीमियम प्राइस चुकाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अगर हालात नहीं बदलते हैं तो ब्रेंट 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। दुनिया में कई देशों का क्रूड का स्ट्रेटेजिक रिजर्व मार्च-अप्रैल के दौरान काफी नीचे जा चुका है।
कई देशों में ऑयल का स्ट्रेटेजिक रिजर्व पहले से ही काफी कम
चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर का रास्ता बंद होने से रोजाना करीब 1.8 करोड़ बैरल क्रूड और करीब 50 लाख बैरल पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई पर असर पड़ा है। पहले से ही यूएस स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व घटकर अब तक के सबसे लो लेवल पर आ चुका है। गोल्डमैन सैक्स ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहता है और मध्यपूर्व में टेंशन बना रहता है तो साल के अंत तक क्रूड 120 डॉलर तक जा सकता है।
भारत का क्रूड आयात बिल सितंबर तिमाही में भी ज्यादा रह सकता है
क्रूड की कीमतों का लंबे समय तक हाई लेवल पर बने रहना भारत के लिए अच्छा नहीं है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। इसका 40 फीसदी हिस्सा मध्यपूर्व से आता है। सरकार क्रूड ऑयल के इंपोर्ट पर निर्भरता घटाने के साथ ही इसके विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सरकार मध्यपूर्व से इतर देशों से भी क्रूड की सप्लाई बढ़ रही है। लेकिन, कीमतों में उछाल से सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ रहा है। जून तिमाही में सरकार का क्रूड इंपोर्ट बिल 60 फीसदी ज्यादा रहा।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पहले ही चार बार ईंधन के दाम बढ़ा चुकी हैं
भारत में पहले ही ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ा चुकी हैं। इससे दिल्ली में पेट्रोल का प्राइस 100 रुपये के पार हो गया है। महंगे और पेट्रोल डीजल से महंगाई बढ़ने का खतरा है। पहले से ही मई और जून में रिटेल इनफ्लेशन बढ़ा है। यह आरबीआई के 4 फीसदी के तय लेवल को पार कर चुका है। इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ने पर आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इससे कर्ज महंगा हो जाएगा, जिसका असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा।