Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को गिरावट देखने को मिली, जो पिछले 2सत्रों की गिरावट को बढ़ा रही है। दरअसल, ओपेक द्वारा उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं के दबाव ने संभावित अमेरिका-चीन व्यापार समझौते की आशा को बेअसर कर दिया। यहीं कारण है कि कच्चे तेल की कीमतों में आज दबाव देखा जा रहा है।
ब्रेंट क्रूड वायदा 4 सेंट गिरकर 65.58 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड वायदा 9 सेंट गिरकर 61.22 डॉलर पर आ गया। दुनिया के महासागरों में भेजे जा रहे तेल की मात्रा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है, जो अतिरिक्त आपूर्ति में लगातार वृद्धि का संकेत है। इसके अलावा, ओपेक+ इस सप्ताहांत एक बैठक में उत्पादन बढ़ाने पर सहमत हो सकता है।
रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनियों - जिन्होंने पिछले सप्ताह कच्चे तेल का उठाव किया था - पर अमेरिकी प्रतिबंध भी चर्चा का विषय रहें। वाशिंगटन ने बर्लिन को रोसनेफ्ट पीजेएससी की जर्मन संपत्तियों को प्रभावित करने वाले स्वामित्व संबंधी अनिश्चितता को सुलझाने के लिए छह महीने की समय सीमा दी है। इस बीच मामले से परिचित अधिकारियों ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी किए बिना प्रशासन की योजना है कि रूस के व्यापार को महंगा और जोखिम भरा बनाया जाए।
तेल की कीमतों में लगातार तीसरी मासिक गिरावट की संभावना है क्योंकि अधिशेष की चिंताओं का दबाव कीमतों पर है। ओपेक+ और प्रतिद्वंद्वी ड्रिलिंग कंपनियां दोनों उत्पादन बढ़ा रही हैं। व्यापारी अमेरिका-चीन व्यापार समझौते की प्रगति पर भी नज़र रख रहे हैं, क्योंकि वार्ताकारों द्वारा समझौते का रास्ता साफ करने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग गुरुवार को एक शिखर सम्मेलन में मिलेंगे।
बैठक से पहले ट्रंप ने कहा है कि वह शी जिनपिंग के साथ रूसी कच्चे तेल के आयात का मुद्दा उठा सकते हैं, क्योंकि चीन एक बड़ा आयातक है। हालिया प्रतिबंधों के बाद कुछ चीनी सरकारी कंपनियों ने मास्को से समुद्री कच्चे तेल की खरीद रद्द कर दी है, जबकि भारतीय रिफाइनरियों ने कहा है कि वे आयात कम कर देगी।