कच्चे तेल की कीमतों को जबरदस्त झटका लगा है। ओपेक+ की ओर से उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि और तेजी से बढ़ती ग्लोबल ट्रेड वॉर के बाद कच्चा तेल 4 साल के निचले स्तर पर आ गया है। इसने मेटल्स से लेकर गैस तक, कमोडिटी बाजारों को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ की बाढ़ के कारण गुरुवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई। इससे वैश्विक आर्थिक विकास और खपत दोनों को खतरा है। कुछ घंटों बाद ओपेक+ देशों ने मई के लिए प्लान्ड उत्पादन वृद्धि को तीन गुना कर दिया। ओपेक+ (Organization of the Petroleum Exporting Countries) ने मई से प्रतिदिन 4.11 मिलियन बैरल उत्पादन वृद्धि की घोषणा की है।
इसके बाद शुक्रवार को चीन ने ऐलान किया कि वह 10 अप्रैल से अमेरिकी सामानों पर 34% टैरिफ लगाएगा। बता दें कि अमेरिका ने चीन पर 31 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लागू किया है। यह चीन पर इस साल पहले लागू किए जा चुके 20 प्रतिशत के टैरिफ से अलग है। इस तरह चीन पर अमेरिका की ओर से नए टैरिफ का आंकड़ा 54 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
शुक्रवार को 8 प्रतिशत टूटा कच्चा तेल
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट फ्यूचर शुक्रवार को 8 प्रतिशत लुढ़का और 2021 में कोरोनावायरस महामारी के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड सिर्फ दो दिनों में 14% नीचे आ चुका है। यह 65 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गया है। वहीं यूएस वायदा भी 2021 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को चीन की ओर से अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ जवाबी एक्शन के कारण नुकसान और बढ़ गया क्योंकि ट्रेड वॉर और गहराने का डर पैदा हो गया है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे माल की मांग के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतें 6 अक्टूबर 2023 के बाद से अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर हैं। बाजार में बढ़ती अस्थिरता और मांग संबंधी चिंताओं के बीच इस सप्ताह तेल की कीमतें अब तक 10% गिर चुकी हैं।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, व्यापक वित्तीय बाजारों में गिरावट के कारण अन्य कमोडिटीज में भी गिरावट आई है। कॉपर में 5.1% की गिरावट आई है, जिससे यह जनवरी के बाद के अपने निचले स्तर पर आ गया है। बेंचमार्क यूरोपीय प्राकृतिक गैस वायदा में लगभग 10% की गिरावट आई है। ग्लेनकोर पीएलसी में 11% की गिरावट आई है।