Currency Market : शुक्रवार को इंट्रा-डे ट्रेड के दौरान US डॉलर के मुकाबले रुपया 74 पैसे गिरकर 94.70 के नए ऑल-टाइम लो पर आ गया। तेल की बढ़ी कीमतों और वेस्ट एशिया विवाद में कोई सफलता नहीं मिलने के बीच डॉलर के मजबूत होने से यह दबाव में आया। जनवरी 2025 के बाद एक महीने सबसे ज्यादा बिकवाली आई।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में, रुपया 94.18 पर खुला और इंट्रा-डे ट्रेड के दौरान US डॉलर के मुकाबले 94.70 पर पहुंचने से पहले 94.50 के लेवल को पार करने तक गिरता रहा, जो पिछले बंद भाव से 74 पैसे कम था।
बुधवार को US डॉलर के मुकाबले रुपया 20 पैसे गिरकर 93.96 के रिकॉर्ड लो पर बंद हुआ। गुरुवार को राम नवमी के कारण स्टॉक, फॉरेक्स, कमोडिटी और बुलियन मार्केट बंद रहे।
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, घरेलू इक्विटी मार्केट में तेज गिरावट और FII के लगातार आउटफ्लो से लोकल यूनिट पर और दबाव पड़ा। FPIs, इंपोर्टर्स, ट्रेडर्स से डॉलर की भारी डिमांड देखने को मिला। डॉलर इंडेक्स 100 के करीब कायम है। RBI ऑफशोर, ऑनशोर, स्पॉट, फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर बेच रहा है। ईरान-इजरायल जंग तीसरे हफ्ते में भी जारी है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर असमंजस, ब्रेंट $100/बैरल के ऊपर कायम है।
जनवरी से अब तक रुपया करीब 5% की गिरावट आई है।
इस बीच गोल्डमैन सैक्स ने इंडियन मार्केट पर अपनी रेटिंग को "ओवरवेट" से घटाकर "मार्केटवेट" कर दिया और निफ्टी 50 इंडेक्स पर अपना प्राइस टारगेट भी कम कर दिया।
ब्रोकरेज ने कहा कि ईरान युद्ध के नतीजों और उसके बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण, उसने अपने महंगाई के अनुमानों में 70 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है, भारत की GDP ग्रोथ में कटौती की है, और 2026 में RBI द्वारा 25 बेसिस पॉइंट्स की दो रेट बढ़ोतरी को भी ध्यान में रखा है।
करेंसी में कमजोरी के साथ, सरकार का 10-साल का बॉन्ड यील्ड भी बुधवार के 6.86% के बंद से घटकर 6.94% हो गया है, जो 7% के निशान के करीब है।
इस बीच फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा, "तेल कंपनियों की लगातार खरीदारी से रुपया 94.50 के पार चला गया। एक्सपोर्टर्स ने अपना इनफ्लो रोक रखा है, जबकि इंपोर्टर्स अपने पेमेंट के लिए डॉलर खरीद रहे हैं।"
गिरावट को रोकने के लिए जंग का जल्द खत्म होना जरुरी
फॉरेन एक्सचेंज एक्सपर्ट के.एन. डे ने कहा कि FII के आउटफ्लो के कारण रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। आरबीआई गिरावट को संभालने की लगातार कोशिश कर रहा है। गिरावट को रोकने के लिए जंग का जल्द खत्म होना जरुरी है। ट्रंप कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। रुपये की गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
रुपया में मौजूदा स्तर से करेक्शन आने की संभावनाए नजर आ रही है। 2-2.5 फीसदी के करेक्शन की और आशंका बनी हुई है।
रुपये की गिरावट का असर बॉन्ड बाजार में भी साफ नजर आ रहा है। सरकार की बॉन्ड यील्ड में तेजी आई। 10 साल की यील्ड 7% के करीब पहुंचा है। बाजार को बाजार में दिक्कतें आने की आशंका है। वित्तीय वर्ष के अंत में कठिनाइयों की आशंका है। इक्विटी बाजार में बिकवाली का बॉन्ड्स पर असर पड़ रहा है। राज्यों ने इस वित्त वर्ष `12.31 लाख करोड़ जुटाए। RBI ने मार्च में $15 बिलियन की बिक्री की है। रुपए को सपोर्ट करने के लिए डॉलर बेचे। RBI का नेट शॉर्ट डॉलर पोजिशन $100बिलियन , जनवरी $67.8 बिलियन था। AAA नॉन SLR कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड 7.25% के ऊपर है।
बॉन्ड मार्केट एक्सपर्ट वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, “ग्लोबल ऑयल शॉक, करेंसी प्रेशर और RBI के नज़रिए में साफ़ बदलाव की वजह से भारत के बॉन्ड मार्केट की कीमत अभी रीप्राइस हो रही है। जब तक तथाकथित “दूसरी कैटेगरी” कोई दखल नहीं देती, G-Secs में 7 परसेंट से ऊपर की बढ़त अब तय लगती है।”