ड्राई फ्रूट्स भारतीय घरों में डाइट का एक अहम हिस्सा बनते जा रहे है। यहीं कारण है कि ड्राई फ्रूट्स में मजबूत ग्रोथ देखने को मिली। जानकारों के मुताबिक सालाना आधार पर 11 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिल रही है। कुल ग्लोबल इंपोर्ट में भारत का 11% हिस्सा है। ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेजी जारी, लेकिन कीमतों में आई तेजी मांग पर भारी पड़ रहे है?
साल 2024 में $9.30 बिलियन का कारोबार कर रहा। 2029 में ड्राई फ्रूट्स इंडस्ट्री$12.70 बिलियन का होने का अनुमान है। सालाना बाजार 7% की दर से बढ़ रहा है। कुल ग्लोबल इंपोर्ट में भारत की 11% हिस्सेदारी है। भारत के इंपोर्ट में US की 35% हिस्सेदारी है।
साल 2023 में ड्राई फ्रूट्स का ग्लोबल बाजार $66.50 बिलियन रह था जो कि 2029 में ड्राई फ्रूट्स इंडस्ट्री का ग्लोबल बाजार बढ़कर $12.70 बिलियन का होने का अनुमान है।
देश में सबसे ज्यादा काजू का इंपोर्ट होता है। कुल इंपोर्ट में काजू की करीब 50% हिस्सेदारी है। 2024 में काजू का $2.40 बिलियन का बाजार रहा जबकि 2029 तक काजू का बाजार $2.90 बिलियन का होगा। काजू का बाजार सालाना करीब 4% की दर से बढ़ रहा है।
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, अफगानिस्तान और सीरिया इन देशों से बादाम का इंपोर्ट होता है। बादाम का ग्लोबल उत्पादन पर नजर डालें तो अमेरिका से ग्लोबल बादाम का उत्पादन 77 फीसदी, ऑस्ट्रेलिया में 9 फीसदी, स्पेन में 4 फीसदी, चीन में 1 फीसदी और तुर्किए से बादाम का ग्लोबल उत्पादन 1 फीसदी हिस्सेदारी है।
भारत, साउथ अफ्रीका काजू का बड़ा उत्पादक देश है। जबकि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया बादाम का बड़ा उत्पादक देश है। जबकि भारत किशमिश का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वहीं भारत, चिली, अमेरिका अखरोट का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। जबकि ईरान, अफगानिस्तान पिस्ता का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
आगे कैसे रहेगी ड्राई फ्रूट्स इंडस्ट्रीज
कैंडर फूड्स यश गवड़ी का कहना है कि ड्राई फ्रूट्स की इंडस्ट्रीज 15 फीसदी की दर से बढ़ रही है। ड्राई फ्रूट्स आज सुपर फूड बन गया है। मांग बढ़ने के लिए ड्राई फ्रूट्स के दाम कम होना जरुरी है। जीएसटी की दर कम होने से दाम कम जो जाएंगे। अंजीर के लिए अफगानिस्तान ही एक बड़ा बाजार है।
सिराज इंटरनेशनल मानव अरोड़ा का कहना है कि डील से टैरिफ घटने की उम्मीद है। ट्रंप टैरिफ पर बाजार की नजर बनी हुई है। 1 लाख लोग बादाम की इंडस्ट्रीज से जुड़े हुए है। अभी अखरोट पर बिल पर ड्यूटी लगती है।
SS एसोसिएट्स के सुमित सरन ने कहा कि पहले 9000 टन पिस्ता का इंपोर्ट होता था। अब 40000 टन पिस्ता का देश में इंपोर्ट होता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चिली से पिस्ता का इंपोर्ट होता है। युवाओं में ड्राई फूट्स के प्रति रुझान बढ़ा है। इस साल दीवाली में ड्राई फ्रूट्स की मांग में इजाफा देखने को मिलेगा। ट्रंप टैरिफ बाजार के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।
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