Edible Oil: खाने के तेल पर सरकारी पहरा? सोयाबीन का उत्पादन 13% बढ़ने की उम्मीद, क्या कीमतों में जारी रहेगा उछाल

Edible Oil: G.K. सूद ने कहा कि मौजूदा ऑर्डर इंडस्ट्री के लिए राहत लेकर आया है। पहले 7 तारीख तक स्टॉक बताना होता था लेकिन अब 15 तक का समय मिला है। प्रोड्यूसर के लिए स्ट़ॉक बताना जरुरी है, ट्रेडर के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि खाने के तेल की क्वालिटी पर सरकार की नजर बनी हुई है

अपडेटेड Aug 04, 2025 पर 2:55 PM
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Edible Oil: कंपनियों के लिए कच्चा माल, उत्पादन, बिक्री, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और स्टॉक के आंकड़ों को सरकार से साझा करना अब जरूरी होगा।

Edible Oil:  सरकार ने VOPPA 2025 को लागू कर दिया है यानी अब से तेल कंपनियों को खरीद और उत्पादन से लेकर बिक्री तक के आंकड़े सरकार को बताने होंगे। सरकार ने VOPPA ऑर्डर 2011 में संशोधन किया है। नियमों में संशोधन 1 अगस्त 2025 से लागू हुआ। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने प्रोड्यूसर्स को आदेश दिया। हर महीने पोर्टल पर डाटा देने का आदेश है। हर महीने की 15 तारीख तक डेटा देना जरूरी होगा।

किन आंकड़ों को देना जरूरी?

कंपनियों के लिए कच्चा माल, उत्पादन, बिक्री, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और स्टॉक के आंकड़ों को सरकार से साझा करना अब जरूरी होगा।


सोयाबीन की बुआई कैसी?

इस साल कर्नाटक में सोयाबीन का उत्पादन 13% बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि पूरे देश में बुआई की स्थिति सामान्य बनी हुई है, लेकिन MP, महाराष्ट्र और राजस्थान में फसल अच्छी हुई।

एग्री एक्सपर्ट G.K. सूद ने कहा कि मौजूदा ऑर्डर इंडस्ट्री के लिए राहत लेकर आया है। पहले 7 तारीख तक स्टॉक बताना होता था लेकिन अब 15 तक का समय मिला है। प्रोड्यूसर के लिए स्ट़ॉक बताना जरुरी है, ट्रेडर के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि खाने के तेल की क्वालिटी पर सरकार की नजर बनी हुई है। सरकार खाने के तेल की कीमतें कम रखना चाहती है।

G.K. सूद ने आगे कहा कि हर देश बायो फ्यूल की तरफ बढ़ रहा है। पूरे खाने के तेल को बायो फ्यूल में बदल भी दें तो भी सिर्फ 5% क्रूड की खपत कम होगी। देश खाने के तेल में आत्मनिर्भरता की तरफ नहीं बढ़ रहा है। इंडस्ट्रीज को अभी इस तरह के नियमों की जरुरत नहीं थी। ट्रैकिंग के लिए पहले से ही नियम मौजूद हैं।

स्टॉक लिमिट लगने पर हमेशा कीमतों में उछाल आया और स्टॉक लिमिट हटने से कीमतें गिरी है। कीमतों में उछाल का फंडामेटल कारण स्टॉक लिमिट नहीं है बल्कि खाने के तेल के दाम रुपये में कमजोरी, इंटरनेशनल मार्केट में दाम चढ़ने और बायो फ्यूल नियमों के कारण होते है।फेस्टिवल सीजन में प्राइस में बढ़ोतरी संभव है क्योंकि वर्ल्ड लेवल पर खाने के तेल की कीमतें बढ़ी है।

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