पोल्ट्री इंडस्ट्री सरकार GM मक्के के इंपोर्ट की मांग कर रही है। दरअसल, देश के 3 लाख करोड़ रुपये का पोल्ट्री इंडस्ट्री इन दिनों कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से दबाव में है। ऐसे में मक्का की बढ़ती कीमतें और एथेनॉल इंडस्ट्री से प्रतिस्पर्धा के कारण अब उद्योग संगठनों ने सरकार से जीएम (जेनिटिकली मॉडिफाइड) मक्का के आयात की अनुमति देने की मांग शुरू कर दी है, ताकि उत्पादन लागत पर काबू पाया जा सके।
पोल्ट्री इंडस्ट्री की दलील है कि इंपोर्ट से लागत कम होगी और कीमतों में स्थिरता आएगी। इंडस्ट्री का कहना है कि पोल्ट्री सेक्टर देश में 60 लाख लोगों को रोजगार देता है और प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत उपलब्ध कराता है। इसके बावजूद कई बार किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पाते।
परेशानी में पोल्ट्री इंडस्ट्री?
मक्का महंगा होने से लागत बढ़ रही है। मक्के का एथेनॉल के लिए डायवर्जन बढ़ा है। डायवर्जन बढ़ने से मक्के का भाव बढ़ा है। देश में हर साल करीब 420 लाख टन मक्का का उत्पादन होता है।इसमें से
एथेनॉल उद्योग को 120–150 लाख टन की आवश्यकता होती है जबकि पोल्ट्री उद्योग करीब 250 लाख टन मक्का उपयोग करता है।
इंडियन पोल्ट्री इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IPEMA) के अध्यक्ष उदय सिंह बायस ने कहा कि मक्का और सोया जैसे जरूरी कच्चे माल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों की तुलना में भारत को कमज़ोर स्थिति में ला रही हैं।
मेरा मानना है कि हमारा उद्योग महंगा होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में हमें प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए सरकार को GM मक्का आयात पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। क्योंकि इससे हमारी प्रोडक्टिविटी बढ़ेगे और हम ज्यादा इंपोर्ट कर सकेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि पोल्ट्री इंडस्ट्री 8-10% की दर से बढ़ रही है लेकिन मक्का उस हिसाब नहीं मिल रहा है। सरकार को एथेनॉल और पोल्ट्री इंडस्ट्री के लिए GM मक्का इंपोर्ट करना चाहिए। अगर सरकार ऐसा करती है तो इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद होगा।