Gold price : मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को गोल्ड अप्रैल फ्यूचर (gold April future) कांट्रैक्ट 51,275 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। वहीं हाजिर सोना (Spot gold) 2,070 डॉलर की हाल की ऊंचाई से वापस लौटा और यह 1,924 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया।
कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स, रूस के कीव के आसपास मिलिट्री ऑपरेशन घटाने का दावा करने से पिछले हफ्ते सेंटीमेंट में कमजोरी देखने को मिली। हालांकि, टकराव में कमी को लेकर खासा संदेह बना हुआ है। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) में मजबूती आने लगी है, वहीं यूएस फेड पहले ही अगली बैठक में दरों में बढ़ोतरी के संकेत दे चुका है। लाइवमिंट के मुताबिक, निम्नलिखित 5 फैक्टर्स का असर आगे मेटल की कीमतों पर दिख सकता है।
मोतीलाल ओसवाल के वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अमित सजेजा ने कहा, हाल में डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली है, जिससे हाजिर बाजार में पीली धातु में मजबूती थमी है। आगे डॉलर इंडेक्स में यदि तेजी आती है तो सोने की कीमतों में अच्छी तेजी पर ब्रेक लगा रहेगा।
Russia-Ukraine news : रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. की वीपी (कमोडिटी और करेंसी रिसर्च) सुगंधा सचदेवा ने कहा, “रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में प्रगति के बीच सोने के लिए पिछले हफ्ते सेफ हैवन डिमांड कम हुई है। रूस ने कीव के आसपास सैन्य कार्रवाई में कमी लाने के वादे से सेंटीमेंट कमजोर हुआ है। हालांकि, इसमें अभी काफी संदेह बना हुआ है, इसलिए सोने को 1,900 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर पर समर्थन बना हुआ है।”
US Fed interest rate hike : आईआईएफएल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने कहा, यूएस फेड की प्रस्तावित बैठक से पहले उसके नतीजों के प्रति मार्केट को तैयार करने की प्रवृत्ति है। उसका हाल का ब्याज दरों में 50 बीपीएस की बढ़ोतरी का बयान इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इससे यूएस फेड मीटिंग और उसके आधिकारिक बयानों पर नजर रखनी चाहिए।
US data : हाल में अमेरिका में बॉन्ड यील्ड से जुड़ा डाटा पॉजिटिव रहा, लेकिन महंगाई के बड़ी चिंता बनी रहने का अनुमान है। आगे अमेरिका के महंगाई के आंकड़े अहम रहेंगे और गोल्ड में निवेश करने वालों को इससे जुड़े ताजा डाटा पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
Rupee vs dollar : आईआईएफएल सिक्योरिटीज के अनुज गुप्ता ने कहा, इन ग्लोबल फैक्टर के साथ ही एक घरेलू फैक्टर पर भी नजर रखने की जरूरत है। रूस-यूक्रेन टेंशन (Russia-Ukraine tension) कम होने के बाद कच्चा तेल कमजोर हुआ है, जिससे अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया मजबूत हुआ है। हालांकि, रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में कोई सकारात्मक घटनाक्रम नहीं होती है तो क्रूड फिर से मजबूत होगा। ऐसे परिदृश्य में डॉलर में मजबूती आएगी, क्योंकि भारत अपनी 85 फीसदी तेल जरूरत के लिए आयात पर निर्भर है।
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