Gold rates in India : ग्लोबल मार्केट के रुझानों की तर्ज पर सोमवार को भारत में सोने की कीमतों में कुछ मजबूती देखी गई, वहीं चांदी की कीमतें भी बढ़ गईं। एमसीएक्स (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स (Gold futures) 0.17 फीसदी की मजबूती के साथ 48,006 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया, जो उसका एक हफ्ते का उच्चतम स्तर है। वहीं चांदी की कीमतें 1 फीसदी बढ़कर 61,494 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बनी हुई हैं।
ग्लोबल मार्केट की बात करें तो सोने में आज तेजी रही, लेकिन यूएस डॉलर की मजबूती से तेजी सीमित हो गई। हाजिर सोना 0.2 फीसदी बढ़कर 1,810.38 डॉसक प्रति औंस पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 95.580 पर बना हुआ था।
बाजार पर तेजड़ियों के नियंत्रण के संकेत
माईगोल्डकार्ट के डायरेक्टर विदित गर्ग ने कहा, “पेरोल डाटा (Payroll data) से पता चलता है कि पिछले महीने 4,67,000 जॉब्स बढ़ीं, जिससे केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने में मदद मिल सकती है। तकनीक रूप से गोल्ड को 1,790 डॉलर पर सपोर्ट मिल रहा है, जिससे काफी हद तक इस पर तेजड़ियों के नियंत्रण के संकेत मिलते हैं लेकिन इसका 1,815 डॉलर और 1,1817 डॉलर से आगे निकलना मुश्किल हो रहा है। 1,817 डॉलर से ऊपर 1,822 डॉलर और 1,826 डॉलर के लिए खरीदारी की जा सकती है।”
इनवेस्टर्स उतार-चढ़ाव के लिए तैयार
ट्रेडर्स आगे इस हफ्ते आने वाले यूएस इनफ्लेशन डाटा से संकेत ले सकते हैं, क्योंकि इनवेस्टर्स विभिन्न असेट्स में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार हैं। अमेरिकी सरकार की बॉन्ड यीड्स में उछाल से विभिन्न फाइनेंशियल असेट्स में उतार-चढ़ाव की स्थिति है।
गुरुवार को आएगा यूएस इनफ्लेशन का डाटा
पिछले हफ्ते जारी यूएस डाटा से पिछले महीने में गैर कृषि रोजगार (nonfarm payrolls) में 4,67,000 जॉब्स की बढ़ोतरी के साथ लेबर मार्केट में मजबूती का पता चलता है। यूएस इनफ्लेशन का डाटा गुरुवार को जारी होना है।
कीमती धातुओं में, चांदी 0.9 फीसदी मजबूत होकर 22.67 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, वहीं प्लेटिनम 0.1 फीसदी बढ़कर 1,025 डॉलर पर बनी हुई थी।
केंद्रीय बैंकों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई
एनालिस्ट्स ने कहा कि केंद्रीय बैंकों ने राहत उपाय वापस लेने शुरू कर दिए हैं, ऐसे में इकोनॉमिक ग्रोथ के जारी रहने को लेकर बहस के बीच फाइनेंशियल असेट्स में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।
कोटक सिक्योरिटीज ने अपनी हाल की एक रिपोर्ट में कहा, “केंद्रीय बैंकों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है, जो एनर्जी और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते बढ़ गई है। यूएस डॉलर, बॉन्ड यील्ड्स और इक्विटीज के ट्रेंड्स के चलते कमोडिटीज प्रभावित हो सकती हैं।”