सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने 800000 टन चीनी के निर्यात की समय सीमा दो हफ्ते के लिए बढ़ा दी है। वार्षिक मानसूनी बारिश के कारण कई उत्पादकों के लिए कारखानों से बंदरगाहों तक स्टॉक ले जाना मुश्किल हो जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ये कदम उठाया है।
अब दुनिया के सबसे बड़े शुगर उत्पादक भारत के शुगर मिलों को 20 जुलाई तक शुगर एक्सपोर्ट करने की मंजूरी होगी। बता दें कि पहले यह डेट 5 जुलाई तय की गई थी। लेकिन मानसूनी बारिश के कारण तमाम चीनी मिल कारखानों से बंदरगाहों तक चीनी पहुंचाने में कामयाब नहीं रहे। इसको ध्यान को रखते हुए सरकार ने इस तिथि को विस्तार दिया है। शुगर इंडस्ट्री ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) के प्रेसिडेंट आदित्य झुनझुनवाला ने कहा है कि सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है। हालांकि बहुत कम मात्रा में एक्सपोर्ट की जाने वाली शुगर फंसी हुई थी लेकिन अब इसको नई डेडलाइन के पहले एक्सपोर्ट किया जा सकेगा।
बता दें कि भारत ने 6 साल में पहली बार मई महीने में शुगर एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाया था और उस वक्त शुगर एक्सपोर्ट की अंतिम तिथि 5 जुलाई तय की गई थी।
सरकार ने घरेलू बाजार में शुगर की कीमतों में बढ़ोतरी पर नकेल कसने के लिए इस शुगर पीरियड की एक्सपोर्ट लिमिट 10 मिलियन टन तय कर दी है। आदित्य झुनझुनवाला का कहना है कि अब सरकार को उस 10 लाख टन रॉ शुगर के एक्सपोर्ट को भी मंजूरी दे देनी चाहिए जिसका उत्पादन चीनी मिलों ने प्रतिबंध लागू होने के पहले एक्सपोर्ट करने के लिए किया था।
उन्होंने आगे कहा कि इस अतिरिक्त एक्सपोर्ट से घरेलू बाजार में किसी शॉर्टेज की उम्मीद नहीं है क्योंकि अगले सीजन में देश में गन्ने की बंपर फसल होने की उम्मीद है। ISMA का अनुमान है कि भारत 30 सितंबर को खत्म होने वाले मार्केटिंग ईयर में ब्राजील को पछाड़ कर दुनिया का सबसे बड़ा शुगर उत्पादक बन सकता है। ISMA का मानना है कि इस मार्केटिंग सीजन में भारत का शुगर उत्पादन 3.6 लाख टन रह सकता है।