एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार भारत सरकार ने 15 जुलाई से प्रभावी रूप से घरेलू पेट्रोलियम कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स (windfall tax ) लगाया है। कच्चे पेट्रोलियम पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Special Additional Excise Duty (SAED) शून्य से बढ़ाकर 1600 रुपये प्रति मीट्रिक टन कर दिया गया है। देश के वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि बदलाव शनिवार से लागू होंगे। इसमें कहा गया है कि सरकार ने डीजल, पेट्रोल और एविएशन टरबाईन फ्यूल पर विंडफॉल टैक्स को शून्य पर छोड़ दिया है। भारत ने मई में पेट्रोलियम कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स को 4,100 रुपये प्रति टन से घटाकर शून्य कर दिया था।
भारत ने पिछले जुलाई में कच्चे तेल उत्पादकों पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। गैसोलीन, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लेवी बढ़ा दी थी। इससे ये उन देशों की बढ़ती संख्या में शामिल हो गया जो ऊर्जा कंपनियों के सुपर नॉर्मल प्रॉफिट पर कर लगाते हैं। पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन (ATF) के निर्यात पर शुल्क लगाया गया था। जबकि स्थानीय स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर एक विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) लगाया गया था।
आज का संशोधन तेल की बढ़ती कीमतों के कारण आया है। पिछले दो हफ्ते में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर पखवाड़े कर दरों की समीक्षा की जाती है।
विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स की गणना उत्पादकों को एक सीमा से ऊपर मिलने वाली किसी भी कीमत पर की जाती है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लीबिया और नाइजीरिया में आपूर्ति में व्यवधान से भी सपोर्ट मिला है। मुख्य रूप से शीर्ष उत्पादक सऊदी अरब और रूस से आपूर्ति में कटौती के जवाब में, दो हफ्ते में तेल की कीमतों में 11% से अधिक की वृद्धि हुई है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency (IEA) की गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस साल तेल की मांग रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएगी। हालांकि व्यापक आर्थिक प्रतिकूलताओं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से ये वृद्धि पहले की अपेक्षा थोड़ी कम होगी।
अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों से पता चलता है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें अपने चरम के करीब थीं। हाल के दिनों में वैश्विक तेल की कीमतें लगभग तीन महीनों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड वायदा 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। बुधवार को आंकड़ों से पता चला कि अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस में जून में मामूली वृद्धि हुई। इसमें दो साल से अधिक समय में सबसे छोटी वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई क्योंकि महंगाई लगातार कम हो रही है।
डेटा के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अप्रैल 2022 के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गया। जिससे तेल की कीमतों को बढ़ने में मदद मिली। जबकि अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए कमजोर डॉलर से कच्चा तेल सस्ता हो गया।