पेट्रोल और डीजल की कीमतें जल्द बढ़ सकती हैं। सरकार के अधिकारियों ने इसके संकेत दिए हैं। इसकी वजह सरकारी तेल कंपनियों को बढ़ता घाटा है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अब तक नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई है, जबकि क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड का भाव अमेरिका-ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुका है।
ईंधन की कीमतें बढ़ाने पर चल रही है चर्चा
सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, "ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कॉस्ट से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बेचने से लॉस हो रहा है। ये कंपनियां लगातार पेट्रोलियम मिनिस्ट्री और फाइनेंस मिनिस्ट्री के संपर्क में हैं। मंत्रालयों के साथ कीमतें बढ़ाने के बारे में चर्चा हो रही है। "
मध्यपूर्व में लड़ाई से क्रूड की कीमतें 100 डॉलर के पार
पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंप पुरी ने मार्च में कहा था कि सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 24 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 30 रुपये का लॉस हो रहा है। उन्होंने कहा था कि क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बावजूद नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं।
सरकार ऑयल कंपनियों ने 4 साल से नहीं बढ़ाई हैं कीमतें
सरकारी तेल कंपनियों ने बीते करीब 4 सालों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। लेकिन, क्रूड की कीमतों में उछाल के बाद इन कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है। क्रूड महंगा होने का असर कंपनियों की बैलेंसशीट और मार्जिन पर पड़ रहा है। फिलहाल क्रूड की कीमतों में नरमी के संकेत नहीं दिख रहे हैं।
कीमतें प्रति लीटर 2-4 रुपये तक बढ़ सकती हैं
एक दूसरे सरकारी अधिकारी ने कहा, "जब सप्लाई में दिक्कत बनी हो तो अनिश्चित समय तक कीमतों को स्थिर नहीं रखा जा सकता। इसलिए कीमतों में इजाफा से इनकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, इंडस्ट्री में इस बात को लेकर हैरानी है कि दबाव बढ़ने के बावजूद डीजल कीमतें अब तक नहीं बढ़ाई गई हैं।" उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें 2-4 रुपये बढ़ सकती हैं।
डीजल महंगा होने से कई चीजों के बढ़ सकते हैं दाम
ईंथन खासकर डीजल की कीमतें बढ़ने का असर कई चीजों की कीमतों पर पड़ता है। इससे इनफ्लेशन बढ़ने का खतरा होता है। इसकी वजह यह है कि डीजल का इस्तेमाल माल की ढुलाई में होता है। इस वजह से डीजल महंगा होने से फल-सब्जियों से लेकर रोजमर्रा की करीब करीब हर चीज महंगी हो जाती है।