उभरते बाजारों में रुपये का प्रदर्शन 2025 में सबसे खराब, जानिए वजह

भारत में बने सामानों पर अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लगाने का असर रुपये पर पड़ा है। हाल में कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 88.31 के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, यह थोड़ा संभलने के बाद 88.19 पर बंद हुआ

अपडेटेड Sep 01, 2025 पर 6:57 PM
रुपया सिर्फ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर नहीं हुआ है। यह चीन की करेंसी युआन के मुकाबले भी कमजोर हुआ है।

उभरते बाजारों में सबसे खराब प्रदर्शन इंडियन करेंसी का है। 2025 में रुपये में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी है। ट्रंप ने इंडिया पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। इससे इंडिया पर कुल टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी हो गया है। यह चीन पर लगाए गए टैरिफ से ज्यादा है। अमेरिका ने चीन पर 30 फीसदी टैरिफ लगाया है। वियतनाम और श्रीलंका में से दोनों पर 20 फीसदी टैरिफ लगाया गया है।

अमेरिकी टैरिफ का रुपये पर असर

भारत में बने सामानों पर अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ लगाने का असर Rupee पर पड़ा है। हाल में कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 88.31 के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, यह थोड़ा संभलने के बाद 88.19 पर बंद हुआ। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ, स्टॉक मार्केट्स में बिकवाली और डॉलर की ज्यादा डिमांड का असर रुपये पर पड़ा है। अगस्त में डॉलर के मुकाबले रुपये में 0.68 फीसदी गिरावट आई है। अगस्त लगातार चौथा महीना है जब डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है।


युआन के मुकाबले भी रुपये में कमजोरी

रुपया सिर्फ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर नहीं हुआ है। यह चीन की करेंसी युआन के मुकाबले भी कमजोर हुआ है। युआन के मुकाबले यह 12.38 के लेवल पर आ गया है। बीते चार महीनों में युआन के मुकाबले रुपये में करीब 6 फीसदी गिरावट आई है। युआन के मुकाबले रुपये की कीमत इंडिया के एक्सपोर्ट के लिए काफी अहम है। खासकर टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और केमिकल जैसे सेक्टर के लिए यह काफी अहम है, क्योंकि इन सेक्टर्स में चीन और भारत के बीच कड़ा मुकाबला है।

इंडियन गुड्स की कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी

शिनहैन बैंक में हेड (ट्रेजरी) कुणाल सोधानी ने कहा कि रुपये में कमजोरी से इंडियन गुड्स की कीमतें विदेश में चीन के गुड्स के मुकाबले प्रतिस्पर्धी होंगी। इससे अमेरिका टैरिफ के असर की कुछ हद तक भरपाई हो सकती है। इससे चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट घटाने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि RBI का फोकस रुपये को गिरने से बचाने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने पर है। कमजोर रुपया भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए फायदेमंद है।

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एक्सपोर्ट घटने का असर जीडीपी ग्रोथ पर

आनंदराठी ग्रुप के चीफ इकोनॉमिस्ट सुजान हाजरा ने कहा कि अमेरिका टैरिफ से इंडियन एक्सपोर्ट्स में करीब 20 अरब डॉलर की कमी आ सकती है। यह इंडिया की जीडीपी का करीब आधा फीसदी है। उन्होंने बताया कि करेंट अकाउंट डेफिसिट में एक फीसदी कमी का मतलब रुपये की वैल्यू में 5 फीसदी गिरावट है। एक्सपोर्ट की ग्रोथ सुस्त रहने पर इंडिया की ग्रोथ में 20-30 बेसिस प्वाइंट्स की कमी आ सकती है। विदेशी निवेशकों की इंडियन स्टॉक मार्केट में बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

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