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जीरे से किसानों को मिला मोटा मुनाफा, अगले साल बढ़ेगा बुआई का रकबा

जीरे में अपनी सफलता की कहानी सुनाने पाटन के एक कार्यक्रम में जुटे करीब 100 किसान और FPO प्रतिनिधि, किसानों ने अपने अनुभव से बताया कि जीरे के भाव बढ़ने से उनकी जिंदगी पर क्या असर हुआ है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 19, 2023 पर 11:44 AM
जीरे से किसानों को मिला मोटा मुनाफा, अगले साल बढ़ेगा बुआई का रकबा
जीरे की खेती में लागत बढ़ने के कारण किसानों ने इसका रकबा घटा दिया था लेकिन अब तगड़ी कमाई के बाद दोबारा बढ़ाया

किसानों को कभी-कभी ही जश्न मनाने का मौका मिलता है और इसबार यह मौका जीरे की खेती करने वाले किसानों को भी मिला है। पहले जीरा किसानों की कमाई ऊंट के मुंह में जीरे की तरह होती थी लेकिन इस साल हालात बदल गए हैं। गुजरात के एक किसान करशन भाई जाडेजा ने कहा, "जीरे की खेती हमारे लिए जुए की तरह है। लागत कई गुना बढ़ गई है और भाव हमेशा कम ही रहते थे। इसीलिए किसान जीरे का रकबा घटाकर सरसों और मेथी की बुआई करने लगे। अब पिछले कई साल में पहली बार इसने हमारा मुनाफा कराया है तो हम बहुत राहत महसूस कर रहे हैं। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि यदि जीरे का भाव बढ़ने से किसानों को फायदा हो रहा है तो हर कोई इसके खिलाफ क्यों बोल रहा है। कम भाव की वजह से जब हमें इतने साल तक घाटा हो रहा था तब तो कोई नहीं बोला।" करशन भाई जाडेजा गुजरात के राधनपुर जिले में करीब 1600 सदस्यों वाली बनास फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी एफपीसी (FPC) के सीईओ भी हैं।

किसानों को हुआ बंपर मुनाफा

जाडेजा उन 100 किसानों में से एक थे, जिन्होंने जीरे का भाव बढ़ने पर चिंता जताने वाली चर्चा के बीच अपनी खुशी और फिक्र दोनों जाहिर कीं। ये किसान एनसीडीईएक्स आईपीटी ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में आए थे। कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि जीरे के लगातार बढ़ते भाव के बीच उन्होंने अपनी फसल कैसे संभाली है। मसाला बोर्ड, कोच्चि के निदेशक (मार्केटिंग) बी एन झा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

चोराड एफपीसी के बाबूलाल भाई ठाकोर ने फसल की लागत के बारे में समझाते हुए कहा, "एक एकड़ में हमें औसतन 2 क्विंटल जीरा मिलता है, जबकि इसकी लागत 30,000 रुपये प्रति एकड़ है। ढुलाई, बोरे में भरने और मजदूरी का खर्च अलग से है। इस साल हमें अपनी लागत के ऊपर अच्छा मुनाफा हुआ है। अपनी जीरे की फसल से इस साल मुझे जो कमाई हुई है, उससे अपनी बेटी की शादी के लिए पैसे का इंतजाम करने के बड़े बोझ से मुझे राहत मिल गई है।" चोराड एफपीसी बनासकांठा जिले में है और करीब 500 किसानों का प्रतिनिधित्व करती है।

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