किसानों को कभी-कभी ही जश्न मनाने का मौका मिलता है और इसबार यह मौका जीरे की खेती करने वाले किसानों को भी मिला है। पहले जीरा किसानों की कमाई ऊंट के मुंह में जीरे की तरह होती थी लेकिन इस साल हालात बदल गए हैं। गुजरात के एक किसान करशन भाई जाडेजा ने कहा, "जीरे की खेती हमारे लिए जुए की तरह है। लागत कई गुना बढ़ गई है और भाव हमेशा कम ही रहते थे। इसीलिए किसान जीरे का रकबा घटाकर सरसों और मेथी की बुआई करने लगे। अब पिछले कई साल में पहली बार इसने हमारा मुनाफा कराया है तो हम बहुत राहत महसूस कर रहे हैं। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि यदि जीरे का भाव बढ़ने से किसानों को फायदा हो रहा है तो हर कोई इसके खिलाफ क्यों बोल रहा है। कम भाव की वजह से जब हमें इतने साल तक घाटा हो रहा था तब तो कोई नहीं बोला।" करशन भाई जाडेजा गुजरात के राधनपुर जिले में करीब 1600 सदस्यों वाली बनास फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी एफपीसी (FPC) के सीईओ भी हैं।
