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Lab Grown Gold: हीरे के बाद अब लैब में बनेगा सोना, कैसी होगी लैब ग्रोन डायमंड की मांग?

लैब ग्रोन डायमंड लेबोरेटरी में बनाया जाना वाला हीरा होता है। लैब ग्रोन डायमंड 1- 4 हफ्ते में तैयार हो जाता है। इसकी बनावट और डिजाइन नैचुरल हीरे जैसी होती है । नैचुरल हीरे के मुकाबले सस्ता होता है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 05, 2024 पर 6:49 PM
Lab Grown Gold: हीरे के बाद अब लैब में बनेगा सोना, कैसी होगी लैब ग्रोन डायमंड की मांग?
सोना एक केमिकल एलिमेंट होता है। हर एटॉमिक न्यूक्लियस में 79 प्रोटॉन होते हैं। पारे, प्लैटिनम से सोने बनाने की कोशिश है।

लैब में सोना बनाने की कोशिश में वैज्ञानिक जुटे है। लैब में डायमंड बनाने में कामयाबी मिल चुकी है। लैब ग्रोन डायमंड के गहने बन भी रहे हैं। लोगों में लैब ग्रोन डायमंड (LGD) की मांग बढ़ रही है। बता दें कि सोना एक केमिकल एलिमेंट होता है। हर एटॉमिक न्यूक्लियस में 79 प्रोटॉन होते हैं। पारे, प्लैटिनम से सोने बनाने की कोशिश है। पारे में 80 और प्लैटिनम में 78 प्रोटॉन होते हैं। 80 में 1 प्रोटॉन निकालकर सोना बनाया जा सकता है। जबकि 78 में 1 प्रोटॉन जोड़ने से भी सोना बनाया जा सकता है। एटॉमिक स्ट्रक्चर में बदलाव से सोना बनाया जा सकता है।

धरती पर कितना सोना?

2023 तक कुल 212582 टन की खुदाई हुई। अगले 20 सालों में 31458 टन सोना और निकाला जाएगा।

क्या है लैब ग्रोन डायमंड

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