Mustard Oil: सरसों की मांग ज्यादा नहीं, सरकार की बिक्री निर्भर करेगी आगे कैसे रहेगी इसकी चाल

हर्षित जैन ने कहा कि सरसों की मांग ज्यादा नहीं है। तेजी कितनी आएगी ये सरकार की बिक्री पर निर्भर करेगा। सरकारी एजेंसियों ने 40 दिन में सिर्फ 1.25 लाख ही बेचा है। सरकारी की सरसों की बिक्री सीमित और दाम ज्यादा है

अपडेटेड Jul 04, 2025 पर 5:25 PM
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सरसों उगाने वाले बड़े राज्यों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल शामिल है।

सरसों के तेल और बीज की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरसों की आवक और घरेलू मांग के कारण कीमतें बढ़ रही हैं। आज यानी 4 जुलाई को सरसों की कीमतें विभिन्न मंडियों में अलग-अलग हैं। कुछ मंडियों में औसत भाव ₹6200-₹6500 प्रति क्विंटल के बीच पहुंच गई है।

देश में सरसों के उत्पादन आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019-20 में 91.24 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ जबकि साल 2020-21 में 102.10 लाख टन, 2021-22 में 119.63 लाख टन, 2022-23 में 126.43 लाख टन और 2024-25 में 126.06 लाख टन उत्पादन हुआ।

सरसों की आवक और पेराई के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1से 31 मार्च 2025 तक सरसों की आवक 14.50 लाख मीट्रिक टन रही जबकि इसकी पेराई 11.50 लाख मीट्रिक टन पर रही। 1 से 30 अप्रैल 2025 तक सरसों की आवक 15 लाख मीट्रिक टन रही जबकि इसकी पेराई 13 लाख मीट्रिक टन पर रही।1 से 31 मई 2025 तक देश में सरसों की आवक 11.00 लाख मीट्रिक टन रही जबकि इसकी पेराई 10.50 लाख मीट्रिक टन पर रही। वहीं 1 से 30 जून तक देश में सरसों की आवक 10.00 लाख मीट्रिक टन रही जबकि इसकी पेराई 11.25 लाख मीट्रिक टन पर रही।


सरसों उगाने वाले बड़े राज्यों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल शामिल है। राजस्थान में 54.10 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 20.35 लाख टन, मध्य प्रदेश में 16.66 लाख टन, हरिय़ाणा में 12.48 लाख टन और पश्चिम बंगाल में 7.96 लाख टन उत्पादन रहा है।

तेजी कितनी आएगी ये सरकार की बिक्री पर निर्भर करेगा

आगे कीमतों में क्या असर दिखेगा? इसपर बात करते हुए सुनहरी किरण ऑयल्स के हर्षित जैन ने कहा कि 1 महीने से अब तक सरसों सी़ड में 400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। सरसों के तेल में 25-27 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी आ चुकी है। उन्होंने कहा कि बाजार में सप्लाई की कमी से दम चढ़ रहे है। 9 लाख टन प्रति महीने से ज्यादा की पेराई नहीं हो रही है। जून में 11-11.5 लाख टन की पेराई नहीं हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि सरसों की मांग ज्यादा नहीं है। मई जून में खाने के तेलों की मांग सबसे ज्यादा गिर जाती है। सरसों में बढ़ी मंदी हम नहीं देख रहे है। प्लांट भी अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रहे है। ज्यादातर सरसों सरकारी एजेंसियों के पास है।

उन्होंने आगे कहा कि तेजी कितनी आएगी ये सरकार की बिक्री पर निर्भर करेगा। सरकारी एजेंसियों ने 40 दिन में सिर्फ 1.25 लाख ही बेचा है। सरकारी की सरसों की बिक्री सीमित और दाम ज्यादा है।

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