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गोल्ड में निवेश का नया तरीका, NSE ने लॉन्च किया Electronic Gold Receipts, जानें सभी अहम डिटेल

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (NSE) ने एक नए ट्रेडिंग सेगमेंट के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGRs) शुरू किए हैं, जिसका मकसद सोने की कीमत का पता लगाने में ट्रांसपेरेंसी और एफिशिएंसी को बेहतर बनाना है

Sujata Yadavअपडेटेड May 05, 2026 पर 8:48 AM
गोल्ड में निवेश का नया तरीका, NSE ने लॉन्च किया Electronic Gold Receipts, जानें सभी अहम डिटेल
Electronic Gold Receipts: एक्सचेंज ने कहा कि यह पहल पारंपरिक फिजिकल गोल्ड ओनरशिप और फॉर्मल फाइनेंशियल मार्केट के बीच के अंतर को कम करने की कोशिश है।

NSE launches Electronic Gold Receipts: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (NSE) ने एक नए ट्रेडिंग सेगमेंट के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGRs) शुरू किए हैं, जिसका मकसद सोने की कीमत का पता लगाने में ट्रांसपेरेंसी और एफिशिएंसी को बेहतर बनाना है।

EGRs डीमटेरियलाइज्ड सिक्योरिटीज हैं जो सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त वॉल्ट में स्टोर किए गए फिजिकल गोल्ड के मालिकाना हक को दिखाती हैं। ये रिसीट डिपॉजिटरी के ज़रिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखी जाती हैं और पूरी तरह से फिजिकल गोल्ड से सपोर्टेड होती हैं, जिससे उन्हें दूसरे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की तरह एक्सचेंज पर ट्रेड किया जा सकता है।

हर EGR सुरक्षित वॉल्ट में जमा किए गए सोने की एक खास मात्रा से मेल खाता है। इन्वेस्टर इन रिसीट को एक्सचेंज पर खरीद और बेच सकते हैं, साथ ही उन्हें फिजिकल गोल्ड में बदलने का ऑप्शन भी रख सकते हैं, जिससे डिजिटल और फिजिकल मार्केट के बीच एक लिंक बनता है।

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