Petrol-diesel Prices: क्या 15 मई से पहले बढ़ने जा रही हैं पेट्रोल और डीजल की कीमतें?

Petrol-diesel Prices: अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। 27 फरवरी को क्रूड का भाव 72 डॉलर प्रति बैरल था। आज भाव (Brent Crude) 100 रुपये प्रति डॉलर के पार है। भारत अकेला ऐसा बड़ा देश है जिसने पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाई है

अपडेटेड May 09, 2026 पर 1:27 PM
Story continues below Advertisement
भारत अकेला ऐसा बड़ा देश है जिसने पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाई है।

Petrol-diesel Prices: पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्या जल्द बढ़ सकती हैं? कई लोगों के मन में यह सवाल चल रहा है। इसकी वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में आया नया उछाल है। फिर से क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है। इससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है। सरकारी ऑयल कंपनियों को बीते 70 दिनों से रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

15 मई से पहले बढ़ सकते हैं दाम

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीत जाने के बाद सरकार कुछ कड़े आर्थिक फैसले ले सकती है। इंडिया टुडे टीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई से पहले इजाफा हो सकता है। इसकी वजह सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का तेजी से बढ़ता घाटा है।


क्रूड का भाव 100 डॉलर से ऊपर चल रहा

अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। 27 फरवरी को क्रूड का भाव 72 डॉलर प्रति बैरल था। आज भाव (Brent Crude) 100 रुपये प्रति डॉलर के पार है। भारत अकेला ऐसा बड़ा देश है जिसने पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाई है। चीन, यूके, नार्वे, जर्मनी और नीदरलैंड्स पेट्रोल की कीमतें 27 फीसदी तक बढ़ा चुके हैं।

ये देश बढ़ा चुके हैं पेट्रोल की कीमतें

जापान, दक्षिण कोरिया, स्पेन और इटली ने तो 30 फीसदी और इससे ज्यादा तक का इजाफा पेट्रोल की कीमतों में किया है। भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को डीजल पर प्रति लीटर 30 रुपये और पेट्रोल पर प्रति लीटर 24 रुपये का लॉस हो रहा है। सरकार ने राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एकसाइज ड्यूटी घटाई थी। इससे सरकार पर 1,70,000 करोड़ रुपये का बोझ पढ़ा है।

यह भी पढ़ें: Gold Price Today: सोने की तेजी थमी, मुंबई में ₹139940 पर 22 कैरेट; चांदी की चमक और बढ़ी

सरकारी तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

कॉस्ट से कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेचने से अप्रैल के अंत तक सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का लॉस 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इसके जून के अंत तक 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने का अनुमान है। कॉस्ट से कम कीमत पर गैस बेचने से होने वाला घाटा करीब 20,000 करोड़ रुपये है। अभी इंडिया के पाल 53.3 लाख टन का पेट्रोलियम का रिजर्व है, जो करीब 15 दिन तक चल सकता है। सरकार इस रिजर्व को बढ़ाना चाहती है। भारत को रोजाना करीब 20,000 टन क्रूड का इंपोर्ट करना पड़ता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।