यूक्रेन क्राइसिस (Ukraine Crisis) को सॉल्व करने की कोशिशें हो रही हैं। रूस-यूक्रेन में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन, अब तक ये बातचीत बेनतीजा रही हैं। इधर, इस क्राइसिस का व्यापक असर दिखने लगा है। क्रूड ऑयल (Crude) की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं।
उधर, कोयला (Coal), जिंक (Zinc), एलुमीनियम (Aluminum), कॉपर (Copper) सहित सभी प्रमुख मेटल में जबर्दस्त उछाल है। इस क्राइसिस के जल्द सॉल्व नहीं होने पर महंगाई बहुत बढ़ जाने का खतरा है। इसका आप पर सीधा असर पड़ेगा। रोजमर्रा की चीजें काफी महंगी हो जाएगी।
क्रूड ऑयल में तेजी जारी है। इसकी कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यह 2014 के बाद से क्रूड का सबसे ज्यादा भाव है। वेस्ट-टेक्सास इंटरमीडिट क्रूड भी 110 डॉलर प्रति बैरल के लेवल को पार कर गया है। इस साल की शुरुआत में क्रूड का भाव 60 डॉलर प्रति बैरल था। युद्ध शुरू होने के बाद यह 25 फीसदी चढ़ चुका है।
क्रूड महंगा होने से दुनियाभर में ट्रांसपोर्टेशन कास्ट बढ़ेगी। इसका सीधा असर हर उस चीज की कीमत पर पड़ेगा, जिसकी ढुलाई होती है। इसमें फल-सब्जियों से लेकर मैन्युफैक्चर्ड गुड्स तक शामिल हैं।
बेस मेटल्स की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। फरवरी में अल्युमीनियम, कॉपर, जिंक, लेड जैसे प्रमुख मेटल की कीमतों में 3.6 से 15 फीसदी की तेजी आई है। सबसे ज्यादा तेजी अल्युमीनियम में आई है। पिछले एक साल में एल्युमीनियम का भाव 58 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। यह कई साल की ऊंचाई पर है। इसका असर मैन्युफैक्चर्ड गुड्स की कीमतों पर पड़ना तय है।
इन मेटल का इनपुट के रूप में कई इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल होता है। ऑटो सेक्टर इसका उदाहरण है। इनकी कीमतें बढ़ने से कंपनियों की कॉस्ट बढ़ जाएगी। फिर उन्हें अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ानी पड़ेगी।
कोयले की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी उछाल आया है। यूरोप में कोयले का फ्यूचर्स बढ़कर 260 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन सहित कई इंडस्ट्री पर पड़ेगा। इंडिया भी बेहतर क्वालिटी के कोयले का इंपोर्ट आस्ट्रेलिया सहित कई देशों से करता है। महंगे कोयले के चलते बिजली मंहगी हो जाएगी।
इंडिया सहित कई देशों में अब भी बिजली बनाने के लिए कोयले का काफी इस्तेमाल होता है। रूस अल्युमीनियम और कॉपर सहित कई बेस मेटल्स का बड़ा उत्पादक है। यूक्रेन क्राइसिस के चलते रूस पर व्यापक प्रतिबंध लग गया है। इसलिए वह मेटल का एक्सपोर्ट नहीं कर पाएगा।