क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में खूब उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एक हफ्ते पहले ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया था। 6 जुलाई (बुधवार) को इसका भाव गिरकर 104 डॉलर पर आ गया। फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद इसका ब्रेंट क्रूड का प्राइस 133 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस उतार-चढ़ाव के बाद फ्यूचर में क्रूड की कीमतों को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
पिछले हफ्ते JP Morgan की एक रिपोर्ट ने चौंकाया था। इस रिपोर्ट में क्रूड का प्राइस 380 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाने का अनुमान जताया गया था। इसमें कहा गया था कि अगर अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के बाद रूस जवाबी कार्रवाई में क्रूड का उत्पादन घटाता है तो इसका प्राइस 380 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
Citigroup ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि क्रूड कका भाव इस साल के अंत तक गिरकर 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आती है तो अगले साल के अंत तक क्रूड का प्राइस गिरकर 45 डॉलर तक आ सकता है।
इन दोनों रिपोर्टों ने लोगों को कनफ्यूज कर दिया है। वे यह जानना चाहते हैं कि फ्यूचर में क्रूड की कीमत ऊपर जाएगी या नीचे। इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें भविष्य का कुछ अंदाजा लगाना होगा। दोनों रिपोर्ट में कीमतों का जो अनुमान लगाया गया है, वह भी भविष्य के अंदाजा पर आधारित है।
सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि क्रूड का प्राइस बहुत ज्यादा वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति पर निर्भर करता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था जब बुलंदी पर होती है तो क्रूड की मांग बढ़ जाती है। इसके चलते इसकी कीमतें भी बढ़ जाती हैं। ठीक इसके उलट वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमजोरी की स्थिति में क्रूड की मांग घट जाती है। इससे कीमतें भी गिर जाती हैं।
जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रूस प्रतिबंधों के जवाब में क्रूड का उत्पादन घटा सकता है। अभी रूस इंडिया, चीन सहित कई एशियाई देशों को क्रूड की बहुत ज्यादा सप्लाई कर रहा है। इंडिया को क्रूड की सप्लाई में रूस अब इराक की बराबरी या उससे ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे वक्त जब ज्यादातर यूरोपीय देश रूस से क्रूड नहीं खरीद रहे हैं तब इंडिया और चीन को सप्लाई से उसे अच्छी आमदनी हो रही है। इसलिए रूस के क्रूड का उत्पादन घटाने की उम्मीद नहीं है।
जहां तक क्रूड की कीमत गिरकर 45 डॉलर प्रति बैरल आने का अनुमान है तो यह हकीकत बन सकता है। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की आशंका जताई जा रही है। इनफ्लेशन अमेरिका में 40 साल की ऊंचाई पर पहुंच चुका है। इसे काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की पॉलिसी अपनाई है। इसका असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर पड़ने की आशंका है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने का असर दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है। इसके चलते पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था हल्की मंदी में जा सकती है। ऐसा होने पर क्रूड की डिमांड में कमी आना तय है। मांग घटने पर इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट दिख सकती है। पहले भी क्रूड का भाव गिरकर 40-50 डॉलर प्रति बैरल तक आ चुका है।