आम आदमी पर बढ़ सकता है पेट्रोल-डीजल की कीमतों का बोझ, जानिए क्यों बढ़ सकता है रेट

ऑयल उत्पादक देशों के संगठन OPEC और उसके सहयोगी देशों ने ऑयल उत्पादन में कमी करने का फैसला किया था। इसके बाद से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ रही हैं। यह 87 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। अगर क्रूड का प्राइस फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच जाता है तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं

अपडेटेड Apr 14, 2023 पर 7:22 PM
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आप पेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल की जो कीमत चुकाते हैं उसमें क्रूड ऑयल की कीमत के अलावा फ्रेट चार्ज, टैक्सेज और डीलर कमीशन का हाथ होता है।

पिछले एक साल से लोगों को पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) की बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। दिल्ली में पिछले साल मार्च में ही पेट्रोल का प्राइस 100 रुपये प्रति लीटर पार कर गया था। अभी वहां कीमत 96 रुपये प्रति लीटर है। डीजल का प्राइस करीब 90 रुपये है। सरकार कहती रही है कि पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों की वजह क्रूड के इंटरनेशनल प्राइसेज हैं। खासकर पिछले साल यूक्रेन पर रूस के हमले शुरू होने के बाद क्रूड (Crude Oil) की कीमतों में उछाल देखने को मिला था। सवाल है कि क्या पेट्रोल और डीजल की जो कीमत आप पेट्रोल पंप पर चुकाते हैं, उसके ज्यादा होने की वजह क्रूड की सिर्फ ऊंची कीमतें हैं?

85% क्रूड ऑयल का आयात

इंडिया क्रूड ऑयल की अपनी 80-85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है। क्रूड ऑयल आयात करने के बाद देश में उसकी रिफाइनिंग होती है। उसके बाद उसे पेट्रोल पंप के जरिए ग्राहकों को उलब्ध कराया जाता है। इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट की कीमतों का सीधा असर पेट्रोल और डीजल के रिटेल प्राइसेज पर पड़ता है। इंडिया ज्यादातर क्रूड मध्य-पूर्व के देशों से इंपोर्ट करता है। इनमें सबसे ऊपर सऊदी अरब और इराक हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से इंडिया ने रूस से इंपोर्ट बहुत बढ़ाया है।


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यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ग्लोबल कीमतें बढ़ीं

रूस क्रूड ऑयल का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि, कई यूरोपीय देश ऑयल और गैस के लिए रूस पर बहुत ज्यादा निर्भर थे। इसके बावजूद उन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए। इससे क्रूड ऑयल की कीमत पिछले साल मार्च में 14 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। एक समय ब्रेंट क्रूड 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, अब ब्रेंट क्रूड का प्राइस घटकर 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

OPEC का उत्पादन घटाने का फैसला

कुछ दिन पहले ऑयल उत्पादक देशों के संगठन OPEC और उसके सहयोगी देशों ने ऑयल उत्पादन में कमी करने का फैसला किया था। उन्होंने कहा है वे ऑयल का उत्पादन रोजाना 16 लाख बैरल घटाएंगे। इस वजह से अगर क्रूड का प्राइस फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच जाता है तो IOC, HPCL और BPCL जैसी रिफाइनिंग कंपनियों को लॉस होना शुरू हो जाएगा।

रिटेल में टैक्स और फ्रेट चार्जेज शामिल

आप पेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल की जो कीमत चुकाते हैं उसमें क्रूड ऑयल की कीमत के अलावा फ्रेट चार्ज, टैक्सेज और डीलर कमीशन का हाथ होता है। सरकार समय-समय पर पेट्रोल और डीजल पर टैक्स के रेट्स में बदलाव करती है। पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारों का टैक्स बहुत ज्यादा है। इस वजह से उसकी रिटेल कीमत बहुत बढ़ जाती है।

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