म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में SIP से निवेश करने पर लंबी अवधि में काफी बड़ा फंड तैयार हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति नौकरी शुरू होते ही SIP में निवेश शुरू कर देता है तो रिटायरमेंट की उम्र में पहुंचने पर उसके पास खर्च के लिए पर्याप्त पैसे उपलब्ध होंगे। उसे रिटायरमेंट बाद के अपने खर्च की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन, बहुत कम इनवेस्टर्स इस बात को समझ पाते हैं। यहीं वजह है कि वे लंबी अवधि तक अपने SIP को जारी नहीं रख पाते। इससे वे बड़ा फंड तैयार करने का मौका चूक जाते हैं। खास बात यह है कि अगर आप SIP के रास्ते MF की स्कीम में निवेश कर रहे हैं तो आपको स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
जल्द निवेश शुरू करना सबसे जरूरी
आइए देखते हैं कि अगर कोई व्यक्ति SIP में हर महीने 25,000 रुपये का निवेश करता है तो 25 साल में उसका फंड कितना बड़ा हो जाएगा। हर महीने 25 हजार रुपये निवेश का मतलब है एक साल में 3 लाख रुपये का निवेश। अगर इस निवेश को 25 साल तक इनवेस्टर जारी रखता है तो उसका कुल निवेश 75 लाख रुपये होगा। अगर हम म्यूचुअल फंड की स्कीम का औसत सालाना रिटर्न 12 फीसदी मान लें तो 25 साल के बाद करीब 5 करोड़ रुपये (4.74 करोड़ रुपये) का फंड तैयार हो जाएगा। अगर आप चाहते हैं कि टैक्स के बाद आपके हाथ में आने वाला अमाउंट 5 करोड़ रुपये हो तो आपको हर महीने 29,200 करोड़ रुपये इनवेस्ट करने होंगे।
हर साल बढ़ा सकते हैं सिप का अमाउंट
आइए अब देखते हैं कि अगर म्यूचुअल फंड की स्कीम का औसत रिटर्न 12 फीसदी की जगह सालाना 11 फीसदी रहता है तो इनवेस्टर को करीब 5 लाख करोड़ रुपये के फंड के लिए कितने समय तक निवेश करना होगा। कैलकुलेशन करने के बाद आप पाएंगे कि 11 फीसदी रिटर्न के हिसाब से आपको करीब 5 लाख रुपये का फंड तैयार करने के लिए 25 साल की जगह 27 साल तक निवेश करना होगा। नौकरी करने वाले व्यक्ति को हर साल कंपनी की तरफ से इंक्रीमेंट मिलता है। इससे आपकी सैलरी हर साल बढ़ती है। आम तौर पर यह इंक्रीमेंट 5 से 15 फीसदी तक होता है।
बाजार की गिरावट से घबराए नहीं
अगर इंक्रीमेंट के बाद हर साल अपने SIP के अमाउंट में 10 फीसदी वृद्धि करते हैं तो सिर्फ 21 साल में आप करीब 5 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं। इस उदाहरण में हम यह देखते हैं कि निवेश के पीरियड का बहुत बड़ा रोल है। इसलिए व्यक्ति जितनी जल्द इनवेस्टमेंट शुरू करेगा, उसके फंड का आकार बढ़ने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। दूसरी अहम बात यह है कि आपको अपने SIP को रोकना नहीं है। आम तौर पर स्टॉक मार्केट में बड़ी गिरावट आने पर इनवेस्टर्स अपना सिप रोक देते हैं।
गिरने के बाद चढ़ता है स्टॉक मार्केट
साल 2008 में फाइनेंशियल क्राइसिस की वजह से स्टॉक मार्केट में बड़ी गिरावट आई थी। तब कई निवेशकों ने डर कर अपने SIP रोक दिए थे। कई निवेशकों ने म्यूचुअस फंड्स की स्कीम से अपने पैसे तक निकालने शुरू कर दिए थे। लेकिन, थोड़े समय के बाद बाजार का रुख बदल गया। मार्केट ने न सिर्फ अपने लॉस की भरपाई की बल्कि उसके प्रमुख सूचकांक नई ऊंचाई पर पहुंचने में कामयाब रहे। मार्च 2020 में भी दोबारा ऐसी स्थिति देखने को मिली। कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद स्टॉक मार्केट में बड़ी गिरावट आई। लेकिन, कुछ ही महीनों में मार्केट ने शानदार रिकवरी दिखाई। उसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी नई ऊंचाई पर पहुंच गए।