प्राइवेट नौकरी करने वाला हर व्यक्ति एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) में कंट्रिब्यूशन करता है। हर महीने आपकी सैलरी से यह पैसा ईपीएफ अकाउंट में चला जाता है। नियम के मुताबिक, आपके लिए हर महीने अपनी सैलरी का 12 फीसदी ईपीएफ अकाउंट में कंट्रिब्यूट करना जरूरी है। आपका एंप्लॉयर (कंपनी जिसमें आप नौकरी करते हैं) भी बराबर अमाउंट ईपीएफ में कंट्रिब्यूट करता है। एंप्लॉयर आपके ईपीएफ अकाउंट में 12 फीसदी से ज्यादा कंट्रिब्यूट नहीं कर सकता। लेकिन, आप ईपीएफ में अपने कंट्रिब्यूशन को 12 फीसदी की तय लिमिट से बढ़ा सकते हैं। इसके लिए आपको Voluntary Provident Fund (VPF) के रास्ते का इस्तेमाल करना होगा।
सिर्फ ईपीएफ में कंट्रिब्यूशन पर्याप्त नहीं
EPF सेविंग्स का एक अहम माध्यम है। यह रिटायरमेंट प्लानिंग में आपकी मदद करता है। लेकिन, सिर्फ ईपीएफ आपके रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है। आपके लिए ज्यादा बचत करना जरूरी है। कई लोग इस बात को बहुत बाद में समझते हैं। नौकरी करने वाला व्यक्ति इस बात को जितनी जल्द समझ ले, उसके लिए उतना अच्छा है।
वीपीएफ कर सकता है आपकी मदद
सवाल है कि आपको कितना अतिरिक्त सेविंग्स करने की जरूरत है और यह सेविंग्स के लिए आपको किस तरह के इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करना चाहिए? इसका एक विकल्प VPF हो सकता है। लेकिन, वीपीएफ में निवेश शुरू करने से पहले आपके लिए बजट 2021 में नियम में हुए बदलाव के बारे में जान लेना जरूरी है। उसमें कहा गया था कि अगर ईपीएफ (वीपीएफ सहित) में एक साल में आपका कुल कंट्रिब्यूशन 2.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है तो अतिरिक्त अमाउंट (2.5 लाख रुपये ज्यादा की रकम) पर आपको टैक्स चुकाना होगा। टैक्स का रेट एंप्लॉयी के टैक्स स्लैब के हिसाब से होगा।
इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझ सकते हैं। मान लीजिए कि ईपीएफ में आपका टोटल कंट्रिब्यूशन 4 लाख रुपये है। तो अतिरिक्त 1.5 लाख रुपये (4-2.5=1.5) पर मिले 8.1 फीसदी इंटरेस्ट पर आपको टैक्स चुकाना होगा। अगर 30 फीसदी टैक्स स्लैब में आते हैं तो टैक्स के बाद आपका रिटर्न 5.67 फीसदी होगा।
एक्सपर्ट्स वीपीएफ की तुलना पीपीएफ से करते हैं। दोनों लंबी अवधि के लिए सेविंग्स में मदद करते हैं। लेकिन, ध्यान रखने वाली बात यह है कि PPF में मिलने वाला 7.1 फीसदी इंटरेस्ट टैक्स-फ्री होता है। लेकिन, उसमें शर्त यह है कि आप एक फाइनेंशियल ईयर में उसमें 1.5 लाख रुपये से ज्यादा इनवेस्ट नहीं कर सकते। वीपीएफ में इनवेस्ट करने के लिए ऐसी कोई लिमिट नहीं है।
सवाल यह है कि क्या आपको वीपीएफ में कंट्रिब्यूशन शुरू कर देना चाहिए? अगर आपका ईपीएफ में सालाना कंट्रिब्यूशन 2.5 लाख रुपये से कम है तो आप वीपीएफ में कंट्रिब्यूशन शुरू कर सकते हैं। आपको सिर्फ इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपका एक साल में कुल कंट्रिब्यूशन 2.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो जाए। अगर आपका ईपीएफ कंट्रिब्यूशन हर महीने 12,500 रुपये है तो यह सालाना 1.5 लाख रुपये हुआ। ऐसे में आप हर महीने 8,333 रुपये का कंट्रिब्यूशन वीपीएफ में कर सकते हैं। यह सालान करीब एक लाख रुपये के बराबर होगा। इससे आपका कुल सालाना कंट्रिब्यूशन 2.5 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा। इस पर मिलने वाले इंटरेस्ट पर आपको किसी तरह का टैक्स नहीं चुकाना होगा।
उपर्युक्त रणनीति रिटायरमेंट प्लानिंग में आपकी मदद कर सकती है। एक तो आपका निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। दूसरा, आपको पता रहेगा कि रिटायमेंट के बाद आपको करीब कितने पैसे हाथ में मिलेंगे। अगर आपको लगता है कि वीपीएफ में कंट्रिब्यूशन के बाद भी आपको अतिरिक्त सेविंग्स की जरूरत है तो आप पीपीएफ अकाउंट ओपन कर सकते हैं।