शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ने म्यूचुअल फंड के निवेशकों को भी परेशान किया है। हर महीने सिप से निवेश के बावजूद उनका पैसा बढ़ नहीं रहा। कई इनवेस्टर्स इससे मायूस हैं। कुछ तो सिप की जगह बैंकों के रेकरिंग डिपॉजिट या एफडी में पैसा रखने के बारे में सोच रहे हैं। अगर आप भी इनमें से एक हैं तो आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखने की जरूरत है।
बाजार में गिरावट की वजह से सिप बंद नहीं करें
कई इनवेस्टर्स अभी सिप बंद करने के बारे में सोच रहे हैं। उनका मानना है कि कुछ समय बाद जब बाजार में तेजी आएगी तो वे फिर से अपना सिप शुरू करेंगे। इस गलती से बड़ी वेल्थ तैयार करने का मौका आपके हाथ से निकल जाएगा। सिप के निवेशकों को बाजार चढ़ने और गिरने दोनों स्थितियों में फायदा है। बाजार चढ़ने पर उनकी यूनिट्स की वैल्यू बढ़ती है। बाजार गिरने पर उन्हें सिप अमाउंट पर ज्यादा यूनिट्स एलॉट होते हैं। ये ज्यादा यूनिट्स निवेशक का पैसा काफी बढ़ा देते हैं, जब बाजार में रिकवरी आती है।
अगर आप नया निवेश शुरू करना चाहते हैं तो आपको मार्केट में तेजी आने के इंतजार नहीं करना चाहिए। सिप से निवेश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आपका पैसा धीरे-धीरे निवेश होता है। इससे लंबी अवधि में आपके निवेश की एवरेज कॉस्ट काफी कम रहती है। इससे लंबी अवधि में बड़ी वेल्थ तैयार करने में मदद मिलती है।
3. हमेशा रिटर्न का कैलकुलेशन नहीं करें
कई इनवेस्टर्स निवेश शुरू करने के बाद हर महीने या हर तिमाही अपने रिटर्न का कैलकुलेशन करने लगते हैं। ऐसा करना गलत है। सिप से म्यूचुअल फंड में निवेश लंबी अवधि में आपके लिए बड़ा फंड तैयार करता है। इसलिए आपको हर महीने अपने रिटर्न का हिसाब नहीं करना चाहिए। 5 साल, 10 साल या इससे ज्यादा अवधि में आप अपने रिटर्न का कैलकुलेशन कर सकते हैं। इससे आपको अपने वेल्थ क्रिएशन का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।
4. पिछले रिटर्न को देख भविष्य के रिटर्न का अंदाजा नहीं लगाएं
कई इनवेस्टर्स निवेश शुरू करने के बाद पिछले सालों जैसे रिटर्न की उम्मीद करने लगते हैं। सच यह है कि आपके फंड का रिटर्न पिछले साल के रिटर्न से कम भी हो सकता है और ज्यादा भी हो सकता है। हर टाइम फ्रेम में स्टॉक मार्केट का व्यवहार अलग होता है। पिछले सालों के रिटर्न से तुलना करने पर आपको निराशा हो सकती है। इस निराशा की वजह से कई इनवेस्टर्स निवेश बंद करने के बारे में सोचने लगते हैं।
5. बगैर टाइमफ्रेम ध्यान में रखें नहीं करें निवेश
म्यूचुअल फंड की स्कीम में सिप से निवेश करने से पहले यह तय कर लें कि आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। इससे काफी फर्क पड़ता है। अगर आपका निवेश लंबे समय के लिए है तो आपको बाजार के उतार-चढ़ाव से परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आपने पांच साल के लिए निवेश किया है तो चौथे साल से आपको सतर्क रहना पड़ेगा। अगर आपने किसी बड़े लक्ष्य के लिए निवेश किया है तो आपको उससे 6-8 महीने पहले पैसे निकाल कर लिक्विड फंड में लगाना होगा। इससे बाजार में अचानक आने वाले गिरावट पर आपके निवेश पर असर नहीं पड़ेगा।
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