कई लोग इनवेस्टमेंट के साथ टैक्स-सेविंग्स का भी फायदा चाहते हैं। ऐसा करने में कोई खराबी नहीं है। टैक्स के नियम इसकी इजाजत देते हैं। लंबी अवधि में यह रणनीति बड़ा फर्क पैदा करती है। अगर 30-35 साल के उम्र के हैं तो इस स्ट्रेटेजी के इस्तेमाल से लंबी अवधि में आपके लिए बड़ा फंड तैयार हो सकता है, जो आपके बच्चों के हायर एजुकेशन, उनकी शादी या रिटायरमेंट बाद आपके काम आ सकता है। आइए ऐसे 5 आसान तरीकों के बारे में जानते हैं।
1. ईएलएसएस में करें निवेश
आप म्यूचुअल फंड की टैक्स-सेविंग्स स्कीम में सिप के जरिए हर महीने निवेश कर सकते हैं। इस स्कीम को इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS) भी कहा जाता है। म्यूचुअल फंड्स हाउस ईएलएसएस ऑफर करते हैं। इस स्कीम का रिटर्न बहुत अट्रैक्टिव है। इस स्कीम में निवेश पर आप हर साल टैक्स डिडिक्शन क्लेम कर सकते है्ं। इस स्कीम में 3 साल का लॉक-इन पीरियड है। इसका मतलब है कि निवेश के तीन साल तक आप पैसा निकाल नहीं सकते। इस नियम की वजह से आपका पैसा लंबे समय तक इनवेस्टेड रहता है, जिससे उसे बढ़ने का पूरा मौका मिलता है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) निवेश की सबसे पुरानी और भरोसेमंद स्कीमों में से एक है। सरकार की स्कीम होने की वजह से इसमें निवेश बिल्कुल रिस्क-फ्री है। इस स्कीम का रिटर्न काफी अट्रैक्टिव है। यह स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। जरूरत पड़ने पर 6 साल बाद कुछ पैसे निकालने की इजाजत है। मैच्योर होने के बाद इस स्कीम की अवधि बढ़ाई जा सकती है। यह फिक्स्ड रिटर्न स्कीम है, जिससे इसके रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता है।
यह भी सरकार की इनवेस्टमेंट स्कीम है। इस वजह से इसमें निवेश पूरी तरह से सुरक्षित है। अगर आपकी बेटी है तो आप सुकन्या समृ्द्धि अकाउंट ओपन कर सकते हैं। शर्त यह है कि बेटी की उम्र 10 साल से कम होनी चाहिए। मैक्सिमम दो बेटियों के लिए यह अकाउंट ओपन किया जा सकता है। सरकारी इनवेस्टमेंट स्कीम में सबसे ज्यादा 8.2 फीसदी का इंटरेस्ट रेट सुकन्या समृद्धि स्कीम का है। यह स्कीम 21 साल में मैच्योर कर जाती है, लेकिन निवेश सिर्फ शुरुआती 15 सालों तक करना होता है।
अगर आपके बच्चे स्कूल या कॉलेज में पढ़ते हैं तो आप उनकी ट्यूशन फीस पर हर साल डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह अकेला ऐसा टैक्स-सेविंग्स का तरीका है, जिसके लिए आपको किसी तरह का इनवेस्टमेंट नहीं करना पड़ता है। आप दो बच्चों तक की ट्यूशन फीस पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इसके लिए आपको ट्यूशन फीस चुकाने का सर्टिफिकेट लेना होगा। स्कूल और कॉलेज मांगने पर यह सर्टिफिकेट देते हैं। इससे आप हर साल हजारों रुपये की टैक्स सेविंग्स कर सकते हैं।
आपको यह ध्यान में रखने की जरूरत है कि ऊपर बताए गए तरीकों का इस्तेमाल सिर्फ ऐसे टैक्सपेयर्स कर सकते हैं, जो इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम का इस्तेमाल करते हैं। अगर आप नई रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो ये तरीके आपके लिए नहीं हैं। इनकम टैक्स का सेक्शन 80सी एक वित्त वर्ष में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये तक निवेश पर डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत देता है। इससे टैक्स का बोझ काफी घट जाता है। 80सी के तहत ऊपर बताए गए तरीकों सहित करीब 1 दर्जन इनवेस्टमेंट ऑप्शंस आते हैं।