रूस-यूक्रेन में युद्ध भड़का तो इंडिया को पेट्रोलियम की सप्लाई पर कितना पड़ेगा असर?

इंडिया ने पिछले साल रूस से 43,400 बैरल ऑयल इंपोर्ट किया। यह इंडिया के कुल इंपोर्ट का 1 फीसदी है। पिछले साल इंडिया ने रूस से 18 लाख टन कोयले का इंपोर्ट किया

अपडेटेड Feb 18, 2022 पर 9:54 AM
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अगर यूक्रेन पर रूस हमला करता है तो उस पर व्यापक प्रतिबंध लग सकता है। इसके अलावा यूक्रेन की बदले की कार्रवाई का सीधा असर फ्यूल की सप्लाई पर पड़ेगा।

रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच टकराव खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। अगर दोनों देशों में युद्ध होता है तो इसका एशिया पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत सहित कई एशियाई देश रूस से क्रूड ऑयल, गैस और कोयला इंपोर्ट करते हैं। रूस फ्यूल का निर्यात करने वाले बड़े देशों की लिस्ट में शामिल है।

इंडिया ने पिछले साल रूस से 43,400 बैरल ऑयल इंपोर्ट किया। यह इंडिया के कुल इंपोर्ट का 1 फीसदी है। पिछले साल इंडिया ने रूस से 18 लाख टन कोयले का इंपोर्ट किया। साल 2020 में इंडिया ने रूस से 25 लाख टन कोयले का आयात किया था। रूस के नेचुरल गैस के एक्सपोर्ट में इंडिया की हिस्सेदारी करीब 0.2 फीसदी है। इंडिया ने गेजप्रोम के साथ गैस इंपोर्ट के लिए 20 साल की डील की है। वह हर साल इस कंपनी से 25 लाख टन एलएनजी खरीदता है।

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अगर यूक्रेन पर रूस हमला करता है तो उस पर व्यापक प्रतिबंध लग सकता है। इसके अलावा यूक्रेन की बदले की कार्रवाई का सीधा असर फ्यूल की सप्लाई पर पड़ेगा। सप्लाई बाधित होने से क्रूड की कीमतें बढ़ सकती हैं। अभी से ही क्रूड के प्राइसेज पर रूस-यूक्रेन के बीच टकराव का असर दिख रहा है। हाल में ब्रेंट क्रूड का भाव 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। अब इसमें थोड़ी नरमी आई है।

रूस के क्रूड आयल के कुल एक्सपोर्ट में चीन की 15.4 फीसदी हिस्सेदारी है। चीन को इससे ज्यादा क्रूड की सप्लाई सिर्फ सऊदी अरब करता है। चीन को गैस की सप्लाई करने के मामले में भी रूस तीसरे पायदान पर है। चीन को कोयले की सप्लाई करने के मामले में भी रूस दूसरे पायदान पर है। इस तरह फ्यूल के मामले में चीन की काफी ज्यादा निर्भरता रूस पर है।

जापान भी रूस से फ्यूल इंपोर्ट करता है। 2021 में जापान को थर्मल कोल की सप्लाई के मामले में रूस दूसरे पायदान पर था। जापान के कोयले के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 12.48 फीसदी है। जापान को क्रूड आयाल और एलएनजी के एक्सपोर्ट के मामले में रूस पांचवें पायदान पर है।

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