OPEC के उत्पादन घटाने के फैसले से क्या 150 रुपये प्रति लीटर पहुंच जाएगा पेट्रोल? जानिए क्या बता रहे हैं एनालिस्ट्स

ओपेक और उसके सहयोगी देशों के उत्पादन में कमी करने के फैसले का असर सोमवार को ऑयल की कीमतों पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Brent Crude का भाव 8 फीसदी के उछाल के साथ 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल के रिटेल प्राइसेज पर पड़ने की उम्मीद है

अपडेटेड Apr 03, 2023 पर 11:50 PM
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऑयल प्रोडक्शन घटाने का फैसला ऐसे वक्त लिया गया है, जब दुनिया के कई बड़े देश महंगाई को काबू में करने की कोशिश कर रहे हैं। ऑयल महंगा होने का सीधा असर इनफ्लेशन पर पड़ेगा।

OPEC और उसके सहयोगी देशों के ऑयल प्रोडक्शन घटाने के फैसले ने मार्केट को चौंकाया है। खासकर तब जब सऊदी अरब जैसे ओपेक के सबसे मजबूत सदस्य ने कहा था कि वह प्रोडक्शन में कमी के प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा। अब सवाल यह है कि क्रू़ड ऑयल (Crude Oil) के प्रोडक्शन में कमी का आप पर क्या असर पड़ेगा? इस सवाल का जवाब बहुत आसान है, क्योंकि सोमवार को शुरुआती कारोबार में ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 8 फीसदी तक उछल गईं।

कीमतों में उछाल

Brent Crude का प्राइस 86.44 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इसका सीधा मतलब है कि पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। इसका असर आपके बजट पर तो पड़ेगा ही साथ ही इंडिया में सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ेगा। इंडिया ऑयल की अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी हिस्सा आयात से पूरी करता है।


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पेट्रोल की कीमतें पहले से 100 रुपये से ज्यादा

इंडिया में पहले से ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के करीब चल रही हैं। पेट्रोल की कीमतें तो ज्यादातर राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर को पार कर गई हैं। इससे कम इनकम वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ईंधन के बढ़ते खर्च को देखते हुए वे अपने दूसरे जरूरी खर्चों में कमी करने को मजबूत हुए हैं। ऐसे में ओपेक और सहयोगी देशों का उत्पादन में कमी का फैसला उनकी मुश्किल और बढ़ाएगा।

महंगाई को काबू में करने में आएगी दिक्कत

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऑयल प्रोडक्शन घटाने का फैसला ऐसे वक्त लिया गया है, जब दुनिया के कई बड़े देश महंगाई को काबू में करने की कोशिश कर रहे हैं। ऑयल महंगा होने का सीधा असर इनफ्लेशन पर पड़ेगा। इंडिया सहित दूसरे देशों की इनफ्लेशन को काबू में करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगेगा। पहले से ही अमेरिका और यूरोपीय देशों की इकोनॉमी पर आक्रामक मॉनेटरी पॉलिसी का खराब असर पड़ रहा है। इनके मंदी में जाने की आशंका जताई जा रही है।

अमेरिका ने फैसले को गलत बताया

अमेरिका ने ओपेक और उसके सहयोगी देशों (OPEC Plus) के उत्पादन घटाने के फैसले की आलोचना की है। उसने कहा है कि मार्केट की मौजूदा स्थितियों को देखते हुए यह कदम पूरी तरह से गलत है। उसने यह भी कहा है कि वह ईंधन की रिटेल कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए उत्पादकों और उपभोक्ताओं के साथ मिलकर काम करेगा।

100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकता है ब्रेंट

Goldman Sachs के एनालिस्ट्स ने कहा है कि पहले के मुकाबले ओपेक प्लस की प्राइसिंग पावर काफी बढ़ गई है। उत्पादन में कमी करने का फैसला चौंकाने वाला है। अगर इसके साथ रूस के उत्पादन घटाने के कदम को मिलाकर देखा जाए तो इस साल दिसंबर तक Brent Crude का प्राइस 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाने का अनुमान है। अगले साल दिसंबर तक प्राइस 100 डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि अक्टूबर में उत्पादन में कटौती के ओपेक प्लस के पिछले फैसले के उलट इस बार ऑयल की ग्लोबल डिमांड पॉजिटिव है। इसकी बड़ी वजह चीन की इकोनॉमी में मजबूत रिकवरी है।

फैसले के इंप्लिमेंटेशन पर रहेगी नजर

बैंक ऑफ अमेरिका ने कहा है कि उत्पादन में रोजाना 10 लाख बैरल की कटौती की वजह से क्रूड का प्राइस 20 से 25 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकता है। बैंक के एक एनालिस्ट ने कहा है कि ओपेक को अब अमेरिकी शेल ऑयल की सप्लाई बढ़ने का कोई डर नहीं है। इसलिए ऑयल की ऊंची कीमतों से उसे पांच साल पहले जैसा रिस्क नहीं है। बैंक ऑफ अमेरिका ने कहा है कि अभी यह तय नहीं है कि उत्पादन में योजनाबद्ध कमी का कितना असर कुल वॉल्यूम पर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इससे पहले ओपेक उत्पादन में कमी के फैसले को ठीक तरह से लागू करने में नाकाम रहा है।

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