Petrol and Diesel prices : तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के दौर में भले ही अर्थव्यवस्था को झटका लगा हो, महंगाई पर दबाव बढ़ा हो लेकिन राज्यों ने अच्छी मलाई काटी है। दरअसल, जब पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ रही थीं, तब राज्यों को वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) के रूप में 49,229 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला था। यही वजह है कि राज्यों के पास अभी पेट्रोल और डीजल पर VAT में कटौती की खासी गुंजाइश हैं। अगर ऐसा होता है तो कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल और सस्ते हो जाएंगे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रिसर्च ने सोमवार को अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
महंगे पेट्रोल पर राज्य काटते हैं मलाई
राज्य पेट्रोल और डीजल की कीमत पर VAT वसूलते हैं। इसका मतलब है कि इनकी कीमतें जितनी ज्यादा होंगी, उनका वैट कलेक्शन (VAT collection) उतना ही ज्यादा होगा और केंद्र सरकार द्वारा एक्साइस ड्यूटी (excise duty) घटाने पर यह खुद ही घट जाएगा।
एसबीआई के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने रिपोर्ट में कहा, “कर अभी भी रेवेन्यू से 34,208 करोड़ रुपये ज्यादा है और इसलिए राज्य अभी तक तेल की कीमतों में कटौती कर सकते हैं। महाराष्ट्र सबसे ज्यादा फायदे में हैं। उसके बाद गुजरात और तेलंगाना हैं।”
पेट्रोल कम से कम 3 रुपये सस्ता कर सकते हैं राज्य
घोष ने कहा कि कोविड-19 के बाद राज्यों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। इससे संकेत मिलते हैं कि जरूरत पड़ने पर उनके पास करों को समायोजित करने के लिए आवश्यक साधान मौजूद हैं। रिपोर्ट में कहा गया, यह राज्यों की कम उधारी से भी जाहिर होता है।
घोष ने कहा कि इन सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखा जाए और यदि तेल पर एक्साइस आई कमी को समायोजित कर लिया जाए तो राज्यों बजट अनुमान से अतिरिक्त और ऊपर ऑयल रेवेन्यू पर कोई फायदा या नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, इससे साफ है कि राज्य तेल पर VAT में कमी किए बिना भी डीजल की कीमत 2 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता कर सकते हैं।
महाराष्ट्र के पास पेट्रोल 5 रुपये सस्ता करने की गुंजाइश
घोष ने कहा, “महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य जिन पर जीडीपी रेश्यो की तुलना में कम कर्ज भी है, वह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर तक कमी कर सकते हैं। इसके अलावा हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और अरुणाचल प्रदेश सहित कई राज्यों का टैक्स-जीडीपी रेश्यो 7 फीसदी से ज्यादा है। हमारा मानना है कि इन राज्यों के पास ईंधन पर कर को समायोजित करने की पर्याप्त वजह हैं।”