Petrol-Diesel Price: पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों से देश की बड़ी आबादी में व्याप्त असंतोष को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों इन पर लागू एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा की थी। पेट्रोल पर लागू एक्साइज ड्यूटी में पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लागू शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। उसके फौरन बाद BJP-शासित राज्यों ने भी स्थानीय वैट की दरों में कटौती कर दी है।
इसके बाद देश के 22 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में पेट्रोल एवं डीजल के दाम में अलग-अलग स्तर की कटौती देखी गई है। हालांकि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे गैर-BJP शासित राज्यों ने स्थानीय शुल्क में अभी कटौती नहीं की है। इस बीच, अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी कटौती की योजना बना रही है।
कीमतों को कम करने के लिए सरकार लेगी बड़ा फैसला
दरअसल, भारत कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में कमी लाने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार (strategic oil reserves) से 50 लाख बैरल कच्चा तेल निकालने की योजना बना रहा है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को पीटीआई को बताया कि दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ तालमेल बनाकर यह कच्चा तेल बाजार में लाया जाएगा। अधिकारी के मुताबिक, अगले हफ्ते-10 दिन में यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि भारत के रणनीतिक भंडार से निकाले जाने वाले कच्चे तेल को मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को बेचा जाएगा। ये दोनों सरकारी तेल कंपनिया रणनीतिक तेल भंडार से पाइपलाइन के जरिए जुड़ी हुई हैं। अधिकारी ने कहा कि इस बारे में औपचारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर भारत अपने रणनीतिक भंडार से और कच्चे तेल की निकासी का भी फैसला ले सकता है।
सरकार क्यों उठा रही है ये कदम?
भारत ने कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में जारी तेजी के बीच अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर अपने इमरजेंसी तेल भंडार से निकासी का मन बनाया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने का आधार तैयार होगा। भारत ने अपने पश्चिमी एवं पूर्वी दोनों तटों पर रणनीतिक तेल भंडार बनाए हुए हैं।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और कर्नाटक के मंगलूरु एवं पदुर में ये भूमिगत तेल भंडार बनाए गए हैं। इनकी सम्मिलित भंडारण क्षमता करीब 3.8 करोड़ बैरल की है। भारत ने यह कदम तेल उत्पादक देशों की तरफ से कीमतों में कमी लाने के लिए उत्पादन बढ़ाने से इनकार करने के बाद उठाने का मन बनाया है।
इसके लिए अमेरिका ने भारत के अलावा चीन एवं जापान से भी मिलकर प्रयास करने का अनुरोध किया था। इस अधिकारी ने अपना नाम सामने न आने की शर्त पर पीटीआई से कहा कि दूसरे देशों के साथ समन्वय बनाकर रणनीतिक भंडार से तेल निकासी का काम शुरू किया जाएगा। इसका समय इस बारे में अमेरिकी सरकार की औपचारिक घोषणा पर निर्भर करेगा।
भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते दुबई में कहा था कि तेल की कीमतें बढ़ने का असर वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम फिलहाल 78 डॉलर प्रति बैरल पर हैं। पिछले महीने यह 86 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा हो गया था लेकिन यूरोप के कुछ देशों में फिर से लॉकडाउन लगने और प्रमुख उपभोक्ता देशों के मिलकर सुरक्षित तेल जारी करने की धमकियों से इसमें गिरावट आई है।