पेट्रोल और डीजल 137 दिन बाद हुए महंगे, अब आगे कहां जाएंगी कीमतें?
नवंबर से अभी तक क्रूड 38 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो चुका है। अब आगे रिटेल कीमतें बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन पूरी बढ़ोतरी का बोझ कंज्यूमर्स पर नहीं डाला जा सकता और बढ़ोतरी धीरे-धीरे होगी
MoneyControl News
अपडेटेड Mar 22, 2022 पर 3:36 PM
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को लगभग 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स आगे भी कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं
Petrol and diesel retail prices : क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब 137 दिनों के बाद 22 मार्च को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil marketing companies) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स आगे भी कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।
अब मुंबई में पेट्रोल 110.78 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.94 रुपये प्रति लीटर का मिल रहा है। वहीं दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.21 रुपये, वहीं डीजल 87.47 रुपये प्रति लीटर है।
हालांकि, कीमतों में इस बढ़ोतरी ने बाजार को सरप्राइज नहीं किया है। आइए, इस बात पर नजर डालते हैं कि ईंधन में बढ़ोतरी की क्यों उम्मीद थी और आगे क्या हो सकता है :
क्यों थी कीमतें बढ़ने की उम्मीद?
इससे पहले डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के एक दिन बाद पेट्रोल की कीमतें 2 नवंबर को बढ़ाई गई थीं। 4 नवंबर को सरकार ने पेट्रोल पर 5 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटा दी। उस समय क्रूड ऑयल की कीमतें 80 रुपये प्रति लीटर के आसपास थीं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते 7 मार्च को ब्रेंट क्रूड बढ़कर 139.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जुलाई, 2008 के बाद का उच्चतम स्तर था। हालांकि अब घटकर यह 118 डॉलर पर आ गया है। वहीं सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में इसकी तुलना में फ्यूल की कीमतों में बदलाव नहीं किया है।
एचपीसीएल (HPCL) के चेयरमैन मुकेश कुमार सुराना ने 25 फरवरी को मनीकंट्रोल दिए इंटरव्यू में कहा था, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कंज्यूमर्स को रोजाना के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए कीमतों में दीर्घकालिक व्यू रखती हैं और अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अनुरूप बदलाव करती हैं।
भारत में एस्सार के 6,500 फ्यूल स्टेशन संचालित करने वाली नयारा एनर्जी (Nayara Energy) ने मनीकंट्रोल को 21 मार्च को बताया कि क्रूड की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमत में बदलाव नहीं करने से उसके मार्जिन में खासी कमी आ गई है।
नयारा, रिलायंस इंडस्ट्रीज और शेल सहित प्राइवेट कंपनियां कीमतें खुद तय करती हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा को देखते हुए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा तय कीमतों को बेंचमार्क माना जाता है।
सरकार ने फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी और हाल में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बीच कोई लिंक होने की बात से इनकार किया है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्रूड की कीमतों में 1 डॉलर की बढ़ोतरी पर फ्यूल में 50 से 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जाती है। नवंबर से अभी तक क्रूड 38 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो चुका है। इसका मतलब है कि 19-24 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है।
रिटेल की तुलना में बल्क डीजल की कीमतें लगभग 25 रुपये ज्यादा हैं, जिससे रिटेल कीमतें बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स ने कहा कि पूरी बढ़ोतरी का बोझ कंज्यूमर्स पर नहीं डाला जा सकता और बढ़ोतरी धीरे-धीरे होगी।
कुछ अधिकारियों ने कहा कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की सीमा तय करने से पहले ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अपने पूरे बिजनेस पर नजर डाल सकती हैं। रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार से कुछ हद तक इसकी भरपाई हो सकती है। इससे क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी को कुछ वहन करने में मदद मिलेगी।
इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती करेगी, जैसा उसने नवंबर में किया था। इससे राज्य भी टैक्स घटाने के लिए मजबूर हो सकते हैं। फ्यूल की रिटेल कीमतों में ड्यूटीज और टैक्स की हिस्सेदारी 40-50 फीसदी है।
हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में कटौती का फैसला आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे उसे रेवेन्यू का खासा नुकसान होगा।
सरकार की इस बात पर भी नजर होगी कि फ्यूल महंगा होने से महंगाई भी बढ़ सकती है। अगर फ्यूल विशेषकर बल्क डीजल महंगा होता रहता है तो कमोडिटीज की ढुलाई की लागत बढ़ेगी और इससे महंगाई बढ़ेगी।
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