Fuel price hike: हर रोज 80 पैसे क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
पिछले 15 दिनों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 13 बार फ्यूल के दाम बढ़ाए हैं। मंगलवार 5 अप्रैल को 80 पैसे की बढ़ोतरी के साथ, अब तक कुल 9.20 रुपये दाम बढ़ चुके हैं
MoneyControl News
अपडेटेड Apr 05, 2022 पर 11:42 PM
बीते 22 मार्च से अब तक 13 बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं
Petrol-Diesel Price Hike: पिछले एक पखवाड़े से पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। लोगों की जेब पर इससे असर तो पड़ा है, लेकिन वे इस बार की बढ़ोतरी से अधिक हैरान नहीं है। दरअसल कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल के बाद लोगों को पहले से अंदाजा था कि फ्यूल के दाम बढ़ने वाले हैं। हालांकि रोज 80 पैसे की बढ़ोतरी ने उन्हें थोड़ा हैरानी में जरूर डाल दिया है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर दाम में रोज 80 पैसे की ही क्यों बढ़ोतरी हो रही है?
सरकारी ऑयल कंपनियां पिछले अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर फ्यूल के दाम तय करती हैं। नई कीमतें सुबह 6 बजे से लागू होती है। पांच राज्यों में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान ऑयल कंपनियों ने रिकॉर्ड 137 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। ऑयल कंपनियों ने बीते 22 मार्च से दोबारा पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने शुरू किए और पिछले 15 दिनों में तब से 13 बार दाम बढ़ाए जा चुके हैं। 5 अप्रैल को 80 पैसे की बढ़ोतरी के साथ, पिछले 15 दिनों में फ्यूल के दाम 9.20 रुपये बढ़ चुके हैं।
मनीकंट्रोल ने इस सवाल को लेकर ऑयल कंपनियों के तीन सीनियर अधिकारियों से बात की। उन्होंने बताया, "80 पैसे की बढ़ोतरी के पीछे कोई स्पेशल कारण नहीं है।" हालांकि तीनों ने कहा कि कि रोजाना बढ़ोतरी को 1 रुपये से कम रखने को लेकर सरकार की तरफ से 'विनम्र अनुरोध' एक वजह हो सकता है।
सरकार ने कई मौकों पर कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमश: जून 2010 और अक्टूबर 2014 के बाद से बाजार द्वारा तय होती है और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां -इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ही इसकी कीमतें तय करती हैं।
हालांकि कच्चे तेल की कीमत नवंबर में 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से बढ़कर मार्च में 139 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने के बाद भी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने तेल के दामों में करीब साढ़े 4 महीनों तक बढ़ोतरी नहीं की। इससे ऐसी अटकलें लगने लगीं कि पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों को देखते हुए इनके दाम नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।
सीनियर डीलर के सुरेश कुमार ने बताया, "ऑयल कंपनियां चुनाव के पहले रोज कीमतों में 10 से 25 पैसे का बदलाव करती थीं। हालांकि फिर उन्होंने लंबे समय तक इसे उसी स्तर पर छोड़ दिया, जिससे इसे जल्द बढ़ाने की जरूरत थी। इसलिए वे इसे एक रुपये से थोड़ा कम बढ़ा रहे हैं ताकि जनता को झटका न लगे। वे थोक ग्राहकों के लिए तो एक बार में 25 रुपये बढ़ा सकते हैं, लेकिन आम ग्राहकों के लिए ऐसा नहीं किया जा सकता है।"
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उनकी प्राइस तय करने की रणनीति पर अधिक जानकारी के लिए ईमेल से सवाल भेजे गए थे, जिसका उन्होंने जवाब नहीं दिया।
मूडीज इनवेस्टर्स सर्विसेज में कॉरपोरेट फाइनेंस ग्रुप के एसोसिएट मैनेजिंग डायरेक्टर, विकास हलान ने बताया, "तेल कंपनियों के लिए एक बार में कीमतें बढ़ाना संभव नहीं है। तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता के बीच सरकार की तरफ से उठाए गए टैक्स उपायों से कीमतों में स्थिरता आती है। भारत में तेल की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं या किसी विशेष दिशा में धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। अगर संक्षेप में कहें तो ग्लोबल स्तर पर जितना तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है, उतना असर पेट्रोल पंपों पर नहीं पड़ा है।"
मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने 24 मार्च को एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को नवंबर से मार्च तक कीमतों में बढ़ोतरी नहीं करने से करीब 2.25 अरब डॉलर (19,000 करोड़ रुपये) के रेवेन्यू का नुकसान हुआ है।
तो अभी और कितनी बार होगी 80 पैसे की बढ़ोतरी?
ऑयल कंपनियों के अधिकारियों ने इस सवाल पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया कि तेल के दामों में कुल कितनी बढ़ोतरी होगी या और कितने दिनों तक रोजाना 80 पैसे की बढ़ोतरी का ट्रेंड जारी रहेगा।
एक सीनियर अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "तेल पर कंपनियों को करीब 25 रुपये प्रति लीटर का नुकसान है। डीजल की बल्क और रिटेल कीमतों की तुलना से यह बात साफ भी होती है। एक आम समझ यह है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इस नुकसान को अगले एक महीने में भरने की कोशिश करेंगी और इस दौरान रोजाना 80 पैसे की बढ़ोतरी का ट्रेंड जारी रह सकता है।"
एक दूसरी ऑयल कंपनी के एग्जिक्यूटिव ने बताया कि यह बढ़ोतरी ये मानकर हो रही है कि कच्चे तेल की कीमतों में आने वाले दिनों में वैसा उछाल नहीं देखने को मिलेगा, जैसा मार्च में आया था। हालांकि तीनों ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की प्राइस तय करने वाली टीम ने ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतों पर करीबी नजर रखा हुआ है।