रूस और अमेरिका की 'जंग' में भारत का फायदा, पुतिन ने दिया सबसे सस्ते तेल का ऑफर

हालात से निपटने के लिए रूस ने नई दिल्ली को एक नया ऑफर दिया है। इसके तहत मॉस्को भारत को पहले से भी कम कीमत पर पेट्रोलियम बेचने का इच्छुक है

अपडेटेड Sep 12, 2022 पर 1:23 PM
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भारत को तेल की आपूर्ति करने वाले देशों की लिस्ट में रूस तीसरे पायदान पर खिसक गया, जो देश की कुल तेल जरूरतों की तुलना में 18.2 फीसदी की आपूर्ति कर रहा है। सऊदी अरब (20.8 फीसदी) और इराक (20.6 फीसदी) भारत के लिए दो अन्य बड़े सप्लायर हैं

रूसी तेल पर प्राइस कैप के संबंध में जी7 देशों (G7 nations) और अमेरिका की तरफ से हो रही लामबंदी का भारत को बड़ा फायदा हो सकता है। दरअसल, हालात से निपटने के लिए रूस ने नई दिल्ली को एक नया ऑफर दिया है। इसके तहत मॉस्को भारत को पहले से भी कम कीमत पर पेट्रोलियम बेचने का इच्छुक है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।

मिल सकता है इराक से बड़ा डिस्काउंट

विदेश मंत्रालय (MEA) के एक अधिकारी ने कहा, सैद्धांतिक रूप से इसके बदले में भारत को G7 (Group of Seven) के प्रस्ताव को सपोर्ट नहीं करना चाहिए। सभी पार्टनर्स के साथ बातचीत के बाद इस मुद्दे पर कोई फैसला लिया जाएगा।


अधिकारियों ने कहा, यह “बड़ा डिस्काउंट” बीते दो महीनों के दौरान इराक से मिले ऑफर से भी बड़ा होगा।

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ऐसे रूस पर भारी पड़ता गया इराक

मई में औसतन 110 डॉलर प्रति बैरल के इंडियन क्रूड इम्पोर्ट बास्केट प्राइस की तुलना में रूस का क्रूड ऑयल (Russian crude oil) भारत को 16 डॉलर प्रति बैरल सस्ता पड़ा था। जून में यह डिस्काउंट घटकर 14 डॉलर प्रति बैरल रह गया, जब Indian crude basket का औसत 116 डॉलर प्रति बैरल रहा था। अधिकारियों ने कहा, अगस्त में Indian crude basket के प्राइस की तुलना में रूसी क्रूड ऑयल 6 डॉलर से भी कम सस्ता पड़ा था।

भारत के सबसे बड़े ऑयल सप्लायर ने जून के आखिर में रूस को पीछे छोड़ दिया, जब उसके क्रूड की रेंज रूसी ऑयल की तुलना में लगभग 9 डॉलर सस्ती पड़ी थी। इसलिए, कीमत के लिहाज से बेहद संवेदशील बाजार इराक के पक्ष में हो गया।

तीसरे स्थान पर खिसका रूस

नतीजतन, भारत को तेल की आपूर्ति करने वाले देशों की लिस्ट में रूस तीसरे पायदान पर खिसक गया, जो देश की कुल तेल जरूरतों के 18.2 फीसदी की आपूर्ति कर रहा है। सऊदी अरब (20.8 फीसदी) और इराक (20.6 फीसदी) भारत के लिए दो अन्य बड़े सप्लायर हैं।

यूरोपियन यूनियन के साथ ही जी7 देश यानी कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूके और अमेरिका वर्तमान रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाने के लिए दबाव बना रहे हैं।

रूस को लगेंगे दो बड़े झटके

पश्चिमी सहयोगी देश इसके जरिये मॉस्को की आर्थिक रूप से कमर तोड़ना चाहते हैं, जो एनर्जी की कीमतों में उछाल के चलते लगातार फायदे में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रूड ऑयल कैप 5 दिसंबर, 2022 से लागू होगा। वहीं रिफाइंड प्रोडक्ट्स पर यह 5 फरवरी, 2023 से लागू होगा।

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