सेबी (Sebi) किसी स्टार्टअप (Startup) और यूनिकॉर्न (Unicorn) की वैल्यू तय करने के पीई फंडों (PE Funds) और वेंचर कैपिटल फंडों (VC Funds) के तरीकों पर विचार कर रहा है। मार्केट रेगुलेटर ने इन फंडों से वैल्यूएशन तय करने करने के तरीकों के बारे में कई जानकारियां मांगी है। उन्हें वैल्यूएशन प्रैक्टिसेज, पिछले तीन साल में वैल्यूएशन के तरीकों में आए बदलाव, वैल्यूएशन तय करने वाले व्यक्तियों के क्वालिफिकेशंस आदि के बारे में बताने को कहा गया है। इकोनॉमिक टाइम्स ने 12 सितंबर को यह खबर दी है।
सेबी ने फंडों से यह भी पूछा है कि क्या वैल्यू लगाने के लिए हायर किया गया व्यक्ति फंड या उसके मैनेजर्स से किसी तरह जुड़ा है या नहीं। मनीकंट्रोल इस रिपोर्ट को स्वतंत्र रूप से वेरिफाय नहीं कर पाया है।
खबर के मुताबिक, सेबी ने इस बारे में 6 सितंबर को निर्देश जारी किए हैं। इसमें फंडों को लेटेस्ट वैल्यूएशन की तारीख, कुल किए गए इनवेस्टमेंट की कॉस्ट, इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो का लेटेस्ट वैल्यूएशन, वैल्यूएशन की प्रक्रिया के ऑडिटेड या अनऑडिटेड कॉपी पर आधारित होने, किसी फाइनेंशियल ईयर के तहत किया गया एडिशनल वैल्यूएशन, वैल्यूएशन मैथडलॉजी की डिटेल आदि सहित कई जानकारियां मांगी गई है।
ईटी से बात करने वाले एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे यह पता चलता है कि मार्केट रेगुलेटर यह जानना चाहता है कि फंडों की तरफ से वैल्यूएशन के लिए अपनाए जा रहे तरीके कितने भरोसेमंद हैं। इससे सेबी को अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंडों (AIF) के प्रदर्शन और इंडस्ट्री में वैल्यूएशन के लिए अपनाए जा रहे तरीकों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।