अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस (Economic Ban of Russia) पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। उन्होंने यूक्रेन पर रूस के हमले के जवाब में ऐसा किया है। इससे क्रू़ड ऑयल (Crude Oil) के प्राइस तेजी से बढ़े हैं। सोमवार को क्रूड का भाव कुछ समय के लिए 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
2008 के बाद से पहली बार क्रूड का भाव इस स्तर पर पहुंचा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अभी रूस के ऑयल पर बैन नहीं लगाया गया है। सवाल है कि अगर रूस के ऑयल पर बैन लगता है तो क्या होगा?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि रूस के ऑयल पर बैन लगने के गंभीर परिणाम होंगे। इसकी वजह यह है कि पेट्रोलियम की ग्लोबल सप्लाई में रूस की बड़ी हिस्सेदारी है। यह रोजाना करीब 70 लाख बैरल क्रूड एक्सपोर्ट करता है। यह कुल ग्लोबल सप्लाई का करीब 7 फीसदी है। इसलिए बैन लगने पर पहले से उबल रहे क्रूड में आग लग जाएगी। इसकी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं।
जेपी मॉर्गन ने कहा है कि बैन लगने पर क्रूड का प्राइस इस साल के अंत तक 185 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। पहले ही कुछ देशों के रूस से ऑयल का इंपोर्ट बंद कर देने से इसकी कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। हालांकि, रायटर्स के पोल में हिस्सा लेने वाले कई इकोनॉमिस्ट्स ने क्रूड का भाव 100 डॉल प्रति बैरल से नीचे रहने की उम्मीद जताई है।
इससे पहले क्रूड का भाव 2014 में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था। हालांकि, क्रूड ने ऊंचाई का रिकॉर्ड जुलाई 2008 में बनाया था। तब क्रूड का प्राइस 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। दो साल पहले क्रूड का भाव गिरकर जमीन पर आ गया था। कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद क्रूड में तेज गिरावट आई थी। वेस्ट टेक्सास क्रूड का भाव जीरो से नीचे पहुंच गया था। इसकी वजह यह है कि सेलर्स इसका स्टॉक घटाने के लिए क्रूड खरीदने वाले को कीमत तक चुकाने को तैयार थे।
महंगे क्रूड का सबसे ज्यादा असर चीजों की कीमतों पर पडे़गा। यह माना जाता है कि ऑयल प्राइस में हर 10 फीसदी की वृद्धि से यूरो जोन में इनफ्लेशन 0.1 से 0.2 फीसदी बढ़ जाता है। अमेरिका में क्रूड के भाव में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से इनफ्लेशन 0.2 फीसदी बढ़ जाता है। रूस क्रूड का बड़ा सप्लायर होने के अलावा अनाज और फर्टिलाइजर्स का भी बड़ा निर्यातक है। इसलिए रूस पर बैन लगाने से ग्लोबल फूड सिक्योरिटी पर भी असर पड़ेगा।
अभी दुनियाभर के देशों की अर्थव्यवस्था रिकवरी के रास्ते पर हैं। कोरोन की महामारी की चोट से उबरने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी आने का सीधा असर देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। इससे ग्रोथ में कमी आएगी।