Ukraine-Russia Crisis:रूस से दूर छिटके उसके कच्चे तेल के ग्राहक, जानिए कितना गहरा हो सकता है इसका असर

एक्सपर्ट्स को लगता है कि अगर पश्चिमी देश रूस के एनर्जी सेक्टर पर कड़ाई से प्रतिबंध लगाने से बचते हैं तो कुछ खरीदार रूस की तरफ रूख कर सकते हैं.

अपडेटेड Mar 05, 2022 पर 3:28 PM
जर्मनी ने पिछले साल अपनी गैस की जरूरत का 55 फीसदी हिस्सा रूस से ही खरीदा था। अभी भी रूस की गैस पाइपलाइन के जरिए जारी है.

रूस अपने तेल को बेचने के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। क्योंकि उसके खरीदारों को अपने ऊपर रूस समर्थक होने का ठप्पा लगने का डर लग रहा है। इसके अलावा सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें और रूस पर और प्रतिबंध लग सकने के डर की वजह से तेल के खरीदार रूस से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से अमेरिका सहित तमाम देशों में कई तरह के प्रतिबंध लाग दिए गए हैं। इसका असर रूस के तेल के एक्सपोर्ट पर देखने को मिल रहा है।

खास बात ये है कि रूस की एनर्जी इंडस्ट्री पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इसके बावजूद Rystad Energy के हेड Jarand Rystad का कहना है कि रूस को अपने एक्सपोर्ट में प्रतिदिन करीब 10 लाख का घाटा उठान पड़ सकता है। बता दें कि पिछले रूस ने प्रतिदिन 1.5 करोड़ बैरल प्रति दिन निर्यात किया था। यह स्थिति तब है जबकि पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई की मुश्किलों की वजह से पूरी दुनिया में इसकी कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। जबकि गैस कीमतें भी अपने रिकॉर्ड हाई पर हैं। यह भी बतातें चलें कि बुधवार को हुई बैठक में ओपेक और दूसरे ऑयल एक्सपोर्ट करने वाले देश, जिसमें रूस भी शामिल है, ने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इससे सप्लाई से जुड़ी समस्या की उम्मीद को बड़ी चोट लगी है।


जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें इस समय रूस के पक्ष में हैं, लेकिन उसके लिए ग्राहकों का अकाल नजर आ रहा है। एनर्जी एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि रूस का ऑयल एक्सपोर्ट 70 फीसदी गिर गया है। इसकी वजह ये है कि बाजार में तेल की कमी के बावजूद ब्रोकर और रिफाइनरीज रूस से दूरी बनाए रहना ही ज्यादा बेहतर समझ रही हैं। अब तक रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में रूस के एनर्जी सेक्टर पर प्रतिबंध लागने से बचा गया है। क्योंकि यूरोप अपनी एनर्जी सप्लाई के लिए बहुत हद तक रूस पर निर्भर है।

जर्मनी ने पिछले साल अपनी गैस की जरूरत का 55 फीसदी हिस्सा रूस से ही खरीदा था। अभी भी रूस की गैस पाइपलाइन के जरिए जारी है, लेकिन आगे इन पर भी प्रतिबंध लगने का डर नजर आ रहा है। ऐसे में यूरोपियन इंपोर्टर दूसरे विकल्पों की तलाश में नजर आ रहे हैं। फिनलैंड के एनर्जी ग्रुप Neste ने कहा है कि उसने रूसी क्रूड का विकल्प लगभगभ पूरी तरह से खोज लिया है। इसी तरह स्वीडन के bitumen product Nynas का कहना है कि वो रूस से कच्चे माल की खरीदारी नहीं करेगा।

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इसके बावजूद एक्सपर्ट्स को लगता है कि अगर पश्चिमी देश रूस के एनर्जी सेक्टर पर कड़ाई से प्रतिबंध लगाने से बचते हैं तो कुछ खरीदार रूस की तरफ रूख कर सकते हैं। इसमें चीन और इंडिया का नाम शामिल हो सकता है। हालांकि अभी ये रूस से तेल नहीं खरीद रहे हैं। लेकिन एक बार शिपिंग , इंश्योरेंस और पेमेंट से जुड़े मुद्दों का कोई समाधान मिलने पर ये रूस से तेल की खरीदारी कर सकते हैं।

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