Weak Rupee and Costly Crude: रुपया 77 के करीब, क्रूड 128 डॉलर पर, जानिए दोनों मिलकर कैसे बढ़ाएंगे आपका बजट

पहली बार रुपया 76.94 के स्तर पर आया है। इससे पहले इसका सबसे कम लेवल 76.91 रह है, जो इसने अप्रैल 2020 में बनाया था। रुपये में कमजोरी की वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल को माना जा रहा है

अपडेटेड Mar 07, 2022 पर 2:21 PM
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रुपया में आई कमजोरी का आप पर सीधा असर पड़ेगा। इससे आयात के लिए हमें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। इससे आयातित चीजों की कीमत घरेलू बाजार में बढ़ जाएंगी।

अभी तक हम क्रूड ऑयल (Crude Oil Prices) की लगातार बढ़ती कीमतों से चिंतित थे। अब रुपया भी हमारी मुश्किल बढ़ाने जा रहा है। सोमवार को एक डॉलर का भाव 77 रुपये (Dollar Rupee Exchange Rate) के करीब पहुंच गया। महंगा क्रूड और कमजोर रुपया हमारी जेब के लिए ठीक नहीं हैं। आने वाले दिनों में ये हमारी मुश्किल काफी बढ़ा सकते हैं। ज्यादा चिंता की बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर महंगाई की ज्यादा मार पड़ती है। यह वर्ग पहले से ही कोरोना की मार से बेहाल है। आइए जानते हैं कमजोर रुपया और महंगे क्रूड का आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा।

डॉलर के मुकाबले रुपया में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया 76.94 के स्तर पर खुला। फिर दोपहर तक यह और गिरकर 76.97 के स्तर तक पहुंच गया। शुक्रवार को यह 76.17 के स्तर पर बंद हुआ था। पहली बार रुपया 76.94 के स्तर पर आया है। इससे पहले इसका सबसे कम लेवल 76.91 रहा है, जो इसने अप्रैल 2020 में बनाया था। रुपये में कमजोरी की वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल को माना जा रहा है।

रुपया में आई कमजोरी का आप पर सीधा असर पड़ेगा। इससे आयात के लिए हमें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। इससे आयातित चीजों की कीमत घरेलू बाजार में बढ़ जाएंगी। हम क्रूड ऑयल के अलावा खाद्य तेलों और दलहन का काफी आयात करते हैं। रुपये में कमजोरी से ये चीजें और महंगी हो सकती हैं। इनकी कीमत पहले से ही ज्यादा चल रही हैं।


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दूसरा, रुपये में कमजोरी से विदेश में पढ़ाई की कॉस्ट बढ़ जाती है। इंडिया के लाखों स्टूडेंट्स अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड जैसे देशों में पढ़ाई करते हैं। उनका खर्च बढ़ जाएगा। इसके अलावा विदेश जाना महंगा हो जाएगा। अगर आप छुट्टियां बिताने या किसी और काम से विदेश जा रहे हैं तो आपको ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। जिन कंपनियों ने विदेशी मुद्रा में लोन लिया है, उनकी मुश्किल बढ़ जाएगी। इसकी वजह यह है कि उन्हें ब्याज के रूप में ज्यादा पेमेंट करना होगा।

सोमवार को क्रूड कुछ समय के लिए 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में यह थोड़ा नरम हुआ। भारतीय समय के अनुसार दिन में करीब 2 बजे ब्रेंट क्रूड का भाव 128 डॉलर प्रति बैरल था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि महंगा क्रूड इंडियन इकोनॉमी को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, क्रूड का औसत भाव 100 डॉलर होने पर करेंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी के 3 फीसदी तक पहुंच सकता है।

क्रूड महंगा होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेंगी। आपके लिए ऑफिस जाना महंगा हो जाएगा। इसका असर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर भी पड़ेगा। इससे फल-सब्जियों से लेकर ज्यादातर चीजें महंगी हो जाएंगी। दरअसल, फ्यूल का दाम बढ़ने का सीधा असर इनफ्लेशन पर पड़ता है। रिटेल इनफ्लेशन पहले ही RBI की तय रेंज से बाहर निकलता दिख रहा है। रोजमर्रा की चीजों महंगी होने का सीधा असर आपके परिवार के बजट पर पड़ेगा। लोग पहले से ही पेट्रोलियम और खाद्य तेलों की ऊंची कीमतों से परेशान हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी परेशानी और बढ़ सकती है।

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