Gold Silver Import Duty : संसाधनों को लेकर बढ़ती दिक्कतों को देखते हुए PM मोदी की खर्च में कटौती की अपील के बाद अब भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा है कि अगर पश्चिम एशिया में लंबे समय तक अशांति जारी रहती है तो भारत को रिटेल पेट्रोलियम की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के हवाले से ये खबर आई है। इसके पहले PM मोदी ने भी विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए देश के लोगों से स्वेच्छा से खर्च में कटौती करने की अपील की थी।
इस अपील में गैस और डीजल का इस्तेमाल कम करना और सोने की खरीद को टालना शामिल था। इस बीच मंगलवार को केंद्र सरकार ने सोने पर कस्टम ड्यूटी को बढ़ा कर लगभग दो गुना कर दिया है। संजय मल्होत्रा मंगलवार को स्विट्जरलैंड में स्विस नेशनल बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे।
भले ही सरकार ने पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों का बोझ अभी तक जनता पर नहीं डाला है। फिर भी भारत की महंगाई दर मार्च के 3.40% से बढ़कर अप्रैल में 3.48% पर आ गई। देश में महंगाई के और बढ़ने का जोखिम भी बना हुआ है। मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भविष्य की संभावनाओं पर भारी पड़ रही हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते भारत को सप्लाई-चेन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इस वित्त वर्ष में,RBI ने 6.9% की ग्रोथ का अनुमान लगाया है,जबकि महंगाई दर औसतन 4.6% रहने की उम्मीद है। हालांकि,अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस संघर्ष के कारण महंगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था की रफ्तार और धीमी हो जाएगी। अप्रैल में, RBI ने अपनी मुख्य पॉलिसी रेट को 5.25% पर ही बनाए रखा था।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी दिए कीमतों में बढ़त के संकेत
बता दें कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी 12 मई को इस बात के संकेत दिए थे कि ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। हरदीप सिंह पुरी ने CII के सालाना बिज़नेस समिट 2026 में कहा कि हमने चुनौती को एक अवसर में बदल दिया है। हमने पिछले चार सालों से कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि कीमतें नहीं बढ़ेंगी। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत देते हुए उन्होंने आगे कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों को 198,000 करोड़ रुपये की 'अंडर-रिकवरी'हो रही है। इस तिमाही में उनका कुल नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये रहा। अगर यह युद्ध जारी रहता है तो हमें राजकोषीय दबाव से निपटने के लिए कदम उठाने होंगे। OMCs कब तक इसे झेल पाएंगी,यह बात मुझे चिंतित करती है। उन्होंने आगे कहा कि ऑयल कंपनियां का पिछले साल कमाया गया सारा मुनाफ़ा,मौजूदा दरों के कारण हो रहे नुकसान की वजह से खत्म होता जा रहा है।