Morgan Stanley की उपासना छाछरा ने हाल में जारी एक नोट में कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है तो भारत सरकार को फ्यूल एक्साइज ड्यूटी में 5-10 रुपए प्रति लीटर की कटौती करनी चाहिए इससे महंगाई के प्रभाव को कम किया जा सकेगा। उन्होंने आगे कहा कि तेल की ऊंची कीमतों से ग्रोथ पर असर देखने को मिलेगा। इससे टैक्स कलेक्शन में भी कमी आने की संभावना है। यहां तक की कोई अतिरिक्त राहत उपाय तेल की कीमतों की बढ़त के चलते पैदा हुए फिस्कल दिक्कतों की भरपाई करने में सक्षम नहीं होगा।
उन्होंने आगे कहा कि महंगाई की दर पहले से ही 6 फीसदी के ऊपर बनी हुई है। तेल की कीमतों में होने वाली और बढ़त और इसके साथ ही रिटेल फ्यूल कीमतों में भी आने वाली बढ़त (रिटेल फ्यूल कीमतों में बदलाव नहीं हुआ है) से महंगाई की दर 6 फीसदी के ऊपर चली जाएंगी। इसके साथ ही बढ़ता हुआ चालू खाता घाटा करेंसी पर अपना दबाव डालेगा जो अंतत: इंफ्लेशन में और बढ़क के रूप में सामने आएगा।
Morgan Stanley का ये भी कहना है कि नीयर टर्म में कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को तेल की बढ़ती कीमतों के असर से बचाने के लिए सरकार अतिरिक्त सब्सिडी या फ्यूल टैक्स में कटौती का प्रावधान कर सकती है। लंबी अवधि में हायर फ्यूल प्राइस की वजह से पॉलीसी मेकर एनर्जी ट्रांजिशन में निवेश बढ़ाने पर फोकस कर सकते हैं।
मॉर्गन स्टैनली के इस नोट में कहा गया है कि ताइवान, इंडोनेशिया, कोरिया और भारत की केंद्रीय बैंक जल्द ही अपने दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। भारत के बारे में मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि भारत में ऐसा कुछ जल्द ही होता नजर आ सकता है। आरबीआई को बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए जल्द ही दरें बढ़ाने का फैसला लेना पड़ सकता है। उम्मीद है कि अप्रैल में होने वाली पॉलिसी मीट में आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।